बीकानेर में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ऊंट महोत्सव की शुरुआत रविवार से हो गई है। महोत्सव में सजे-धजे ऊंट और इन पर बैठे रोबीले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। आएइ...अब आपको दिखाते हैं ऊंट महोत्सव की तस्वीरें...
बीकानेर में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ऊंट महोत्सव की शुरुआत रविवार से हो गई है। महोत्सव में सजे-धजे ऊंट और इन पर बैठे रोबीले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने बाड़मेर के गेर नृत्य शानदार प्रदर्शन किया। जोधपुर के कालबेलिया, गुजरात के सिद्धि धमाल और खाजूवाला के मशक वादकों की सूरताल लोगों को उत्साहित कर रही है। आएइ...अब आपको दिखाते हैं ऊंट महोत्सव की तस्वीरें
महोत्सव में ऊंटों को सजाने को लेकर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। पर्यटन विभाग ने प्रतियागिता में विजेता बने ऊंटों को पुरस्कार भी दिया गया। लक्ष्मणराम ने पहला, इमरान खान ने दूसरा और गोधुराम ने तीसरा पुरस्कार जीता।
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सजे-धजे ऊंटों पर सवार हुए रोबीले।
- फोटो : अमर उजाला
महोत्सव में सजे-धजे ऊंटों पर बैठकर घूम रहे रोबीले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे। पारंपरिक वेशभूषा में इनका रौब देखते ही बन रहा था।
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कलाकारों किया प्रदर्शन।
- फोटो : अमर उजाला
तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ऊंट महोत्सव के पहले दिन राजस्थानी लोक कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य किया। कलाकारों के इस नृत्य ने सभी को रोमांचित कर दिया। लोगों उत्साह के साथ तालियां बजा रहे थे।
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ऊंटों ने दिखाए अलग-अलग करबत।
- फोटो : अमर उजाला
मालिकों के इशारे पर करतब दिखाने के साथ ही ऊंटों ने ढोल की धाप पर जमकर डांस भी किया। ऊंची छलांगे मारकर ऊंटों ने लोगों को अचंभित कर दिया। ऊंटों का डांस और करतब देख लोग हैरान हुए और फिर जमकर तालियां बजाई।
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मशक पर कलाकारों ने किया प्रदर्शन।
- फोटो : अमर उजाला
आज होंगे ये कार्यक्रम: शाम साढ़े छह बजे से 10 बजे तक पब्लिक पार्क में बीकानेर कार्निवल का आयोजन होगा। कार्निवल राजकीय गंगा संग्रहालय से शुरू होगा। इस दौरान पर्यटक बीकानेर की संस्कृति से रूबरू होंगे।
फीका रहा ऊंट महोत्सव: देश-विदेश में प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव का आगाज रविवार को हुआ। तीन दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव का पहला दिन फीका नजर आया। मूलभूत सुविधा के लिए भी लोग इधर-उधर भटकते नजर आए। इस उत्सव में हर वर्ष बड़ी संख्या में विदेशी सैलानी शामिल होते हैं, लेकिन रविवार को लक्ष्मीनाथ मंदिर से शुरू हुए इस महोत्सव में विदेशी सैलानी कम ही नजर नहीं आए। राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र में आयोजित कार्यक्रमों में भी पर्यटकों की संख्या कम ही रही।