अंतिम यात्रा में उमड़े सैकड़ों लोग।
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इससे पहले शहीद राजेंद्र प्रसाद का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा तो कोहराम मच गया। उनकी पत्नी तारामणी और मां श्रवणी देवी बार-बार बेहोश हो रहीं थीं। परिवार वाले जैसे तैसे दोनों को संभाल रहे थे। वहीं, उनके तीनों बच्चों की आंखें भी नम थीं, लेकिन उन्हें अपने पिता की शहादत पर गर्व है। उनकी बेटी प्रिया, साक्षी और बेटे अंशुल ने हाथों में तिरंगा पकड़कर पिता के अंतिम दर्शन किए।