चेतना के शव को अस्पताल लाया गया
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देसी जुगाड़ फेल होने पर पाइलिंग मशीने से 170 फीट गहरा गड्डा खोदा जाना था। आमतौर पर पाइलिंग मशीन यह काम पांच-छह घंटे में आसानी से कर देती है। लेकिन, यहां हालात कुछ और थे। जमीन के अंदर पत्थर थे। 150 फीट तक की गहराई में मिले कच्चे पत्थर तो आसानी से कट गए, लेकिन इसके बाद मजबूत पत्थरों को काटने में समय लगता गया। इस दौरान दो पाइलिंग मशीन का इस्तेमाल किया गया एक 150 फीट कैपेसिटी और दूसरी 171 फीट कैपेसिटी वाली। इसके बाद भी 175 फीट गहरा गड्डा नहीं हो पाया।
तमाम परेशानियों के कारण रेस्क्यू अभियान में लगातार देरी हो रही थी। इसी बीच मौसम बदला और बारिश शुरू हो गई। डेढ़ दिन बारिश ने खराब किया, इससे गड्ढे में डाले जाने वाले पाइप की बेल्डिंग नहीं हो सकी। बारिश बंद होने के बाद काम पूरा किया, लेकिन पाइप नीचे तक फिट नहीं होने के कारण रेस्क्यू टीम को नीचे उतारने में समय लगा।
रेस्क्यू टीम ने गड्ढे में उतरकर सुरंग की खोदाई शुरू की। करीब आठ-दस फीट सुरंग खोदनी थी, लेकिन यह किसी चुनौती से कम नहीं था। एक तो बहुत अधिक गहराई में खोदाई की जानी थी, दूसरा नीचे मजबूत पत्थर थे। ऐसे में धीरे-धीरे ड्रिल करके पत्थरों को काटा गया। अगर, इसमें थोड़ी भी लापवाही होती तो मिट्टी भी धसक सकती थी।