निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा
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सबसे ज्यादा प्रत्याशी इसी बार मैदान में
इस बार उपचुनाव में यहां आम चुनाव से ज्यादा रौनक है। पिछले चार चुनावों के मुकाबले इस बार सबसे ज्यादा प्रत्याशी मैदान में हैं। इनमें मोरपाल सुमन-भाजपा, प्रमोद जैन भाया-कांग्रेस, योगेश कुमार शर्मा-राइट टू विकास पार्टी, राजपाल सिंह शेखावत-परिवर्तन पार्टी, जमील अहमद निर्दलीय, दिलदार धरमवीर, नरेश, नरेश कुमार मीणा, नौशाद, पंकज कुमार, पुखराज, सोनेल, बंशीलाल, बिलाल खान और मंजूर आलम के नाम शामिल हैं।
प्रतिष्ठा का चुनाव क्यों? क्या कहते हैं विश्लेषक
अंता उपचुनाव के नतीजे राजनीतिक जोड़-भाग में कोई फर्क तो नहीं ला सकते, लेकिन फिर भी इसे प्रतिष्ठा से जोड़कर क्यों देखा जा रहा है, यह बड़ा सवाल है? दरअसल अंता के नतीजे यह बताएंगे कि जीत और हार का क्रेडिट किसके खाते में लिखा जाएगा।
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वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक मनीष गोधा बताते हैं कि यह प्रतिष्ठा का चुनाव इसलिए है क्योंकि एक तरफ पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया है जो बारां में सबसे बड़ा नाम है। दूसरी तरफ इस सीट से वसुंधरा राजे का नाम भी जुड़ा हुआ है। अंता उनके परिवार की लोकसभा सीट बारां-झालावाड़ का ही हिस्सा है। यहां से पिछली बार विधायक रहे कंवरलाल मीणा वसुंधरा राजे के बेहद खास माने जाते थे। यह भी कहा जा रहा है कि बीजेपी प्रत्याशी मोरपाल सुमन को टिकट वसुंधरा राजे की सहमति से ही मिला है।
अंता उपचुनाव फील्ड में कवर कर रहे वरिष्ठ पत्रकार अंकित तिवाड़ी का कहना है कि अंता में सरकार बीजेपी की है, इससे ज्यादा असर किस व्यक्ति को चुनना है इस बात को दिया जा रहा है। मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस में है। बीजेपी ने नए चेहरे को उतारकर गुटबाजी को पूरी तरह खत्म किया है। कोशिश यह भी की है कि झालावाड़ जिले के निर्णय में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे की भागीदारी को निर्णयात्मक रूप से कम किया जाए। कांग्रेस इस सीट को विपक्ष की प्रतिष्ठा के आधार पर देख रही है। दोनों बड़ी पार्टियों को लगता है, निर्दलीय प्रत्याशी सामने वाले खेमे के वोट ज्यादा काटेगा। आम जनता भी सरकार के शेष तीन साल में किसे अपना प्रतिनिधि बनाएगी यह बात मन में रखकर ईवीएम तक पहुंचने वाली है। इस बार चुनाव में काफी शांति बनी हुई है।