स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में वागड़ अंचल (बांसवाड़ा-डूंगरपुर-प्रतापगढ़) का योगदान विशिष्ट और प्रेरणादायक रहा है। अंग्रेजी शासन और तत्कालीन रियासतों के सत्ताधीशों से संघर्ष करने वाले क्रांतिकारियों ने न केवल राजनीतिक आजादी के लिए लड़ाई लड़ी, बल्कि सामाजिक कुरीतियों को मिटाने और शिक्षा के प्रसार में भी अहम भूमिका निभाई।
गोविंद गुरु, गौरीशंकर उपाध्याय, बाबा लक्ष्मणदास, भूपेंद्रनाथ त्रिवेदी, धूलजी भाई भावसार, हरिदेव जोशी, नटवरलाल भट्ट, मास्टर सूरजमल, चिमनलाल मालोत, मणिशंकर नागर, मोहनलाल त्रिवेदी, बाबूलाल जौलाना, कन्हैयालाल सेठिया, भंवरलाल निगम जैसे अनेक सेनानी ऐसे थे, जिन्होंने देश के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। अंग्रेजों की लाठियां खाईं, जेल गए लेकिन आजादी के सपने को साकार करने में कभी पीछे नहीं हटे।