डॉ. गिरिजा व्यास
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नाथद्वारा की बेटी डॉ. व्यास दर्शन शास्त्र में डॉक्टरेट करके अमेरिका तक पहुंचीं। मगर जड़ों से जुड़ी रहीं। उन्होंने न केवल विश्वविद्यालयों में पढ़ाया, बल्कि आठ किताबें भी लिखीं, जिनमें से 'एहसास के पर' और 'सीप, समुद्र और मोती' आज भी पाठकों को झकझोरते हैं।
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25 वर्ष की उम्र में जब वो पहली बार विधायक बनीं, तो किसी ने नहीं सोचा था कि एक दिन वही महिला संसद, मंत्रालय, महिला आयोग और प्रदेश कांग्रेस जैसे अहम मंचों की आवाज़ बनेंगी। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में उनके निर्णय, महिला सशक्तिकरण की दिशा में उनके कदम और स्ट्रीट वेंडर कानून जैसी पहल उन्हें दूरदर्शी नेता साबित करती हैं।