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Tripura Sundari Temple: यहां दिन में तीन बार बदलता है मां का स्वरूप, पीएम से सीएम तक लगा चुके हैं हाजिरी

Mon, 30 May 2022 04:19 PM IST
रोमा रागिनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा

सार

देश में 52 शक्तिपीठों में से एक बांसवाड़ा का त्रिपुरा सुंदरी मंदिर भी है। यह मंदिर सम्राट कनिष्क के काल से पहले से ही प्रसिद्ध मंदिर रहा है।
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त्रिपुरा सुंदरी माता - फोटो : Social Media
राजस्थान के दक्षिणांचल में स्थित बांसवाड़ा जिला अपने सुंदरता के लिए मशहूर है। इसके साथ ही यहां सैंकड़ों साल प्राचीन कई मंदिर हैं, जिससे यह धार्मिक आस्था का भी केंद्र बनता जा रहा है। यहीं एक सिद्ध माता त्रिपुरा सुंदरी का मंदिर है, जो 52 शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है कि मंदिर में मांगी हर मनोकामना देवी पूर्ण करती हैं, यही वजह है कि आमजन से लेकर नेता तक मां के दरबार में पहुंचकर हाजिरी लगाते हैं।
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त्रिपुरा सुंदरी मंदिर बांसवाड़ा - फोटो : Social Media
यहां अठारह भुजाओं वाली है मूर्ति
बांसवाड़ा जिले से करीब 18 किलोमीटर दूर तलवाड़ा गांव में अरावली पर्वतामाला के बीच माता त्रिपुरा सुंदरी का भव्य मंदिर है। मुख्य मंदिर के द्वार के किवाड़ चांदी के बने हैं। मां भगवती त्रिपुरा सुंदरी की मूर्ति अष्टदश यानी अठारह भुजाओं वाली है। मूर्ति में माता दुर्गा के नौ रूपों की प्रतिकृतियां अंकित हैं। मां सिंह, मयूर और कमल आसन पर विराजमान हैं। 
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भव्य है त्रिपुरा सुंदरी का मंदिर - फोटो : Social Media
तीन रूपों में देती हैं दर्शन
भक्तों का कहना है कि प्रात:कालीन बेला में कुमारिका, मध्यान्ह में यौवना और सायंकालीन वेला में प्रौढ़ रूप में मां के दर्शन होती है। इसी कारण माता को त्रिपुरा सुंदरी कहा जाता है। हालांकि, यह भी कहा जाता है कि मंदिर के आस-पास पहले कभी तीन दुर्ग थे। शक्तिपुरी, शिवपुरी और विष्णुपुरी नामक इन तीन पुरियों में स्थित होने के कारण देवी का नाम त्रिपुरा सुंदरी पड़ा। 

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नवरात्र में होता है माता का विशेष श्रृंगार - फोटो : Social Media
कनिष्क काल से प्रसिद्ध है मंदिर
वर्तमान में इस मंदिर के उत्तरी भाग में सम्राट कनिष्क के समय का एक शिवलिंग है। मान्यता है कि यह स्थान कनिष्क के पूर्व-काल से ही प्रतिष्ठित रहा होगा। वहीं कुछ विद्वान देवी मां की शक्तिपीठ का अस्तित्व यहां तीसरी सदी से पूर्व मानते हैं। उनका कहना है कि पहले यहां ‘गढ़पोली’ नामक एक ऐतिहासिक नगर था। ‘गढपोली’ का अर्थ है-दुर्गापुर। ऐसा माना जाता है कि गुजरात, मालवा और मारवाड़ के शासक त्रिपुरा सुंदरी के उपासक थे।
 
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तीन रूपों में होते हैं माता के दर्शन - फोटो : Social Media
मालवा नरेश ने मां को अपना शीश काट कर चढ़ाया था
एक किवदंती यह भी है कि मां त्रिपुरा सुंदरी गुजरात के सोलंकी राजा सिद्धराज जयसिंह की इष्ट देवी थी। वो मां की पूजा के बाद ही युद्ध पर निकलते थे। यह भी कहा जाता है कि मालवा नरेश जगदेव परमार ने तो मां के चरणों में अपना शीश ही काट कर अर्पित कर दिया था। उसी समय राजा सिद्धराज की प्रार्थना पर मां ने जगदेव को फिर से जीवित कर दिया।
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नवरात्र में बड़ी संख्या में आते हैं श्रद्धालु - फोटो : Social Media
प्रसिद्ध शक्तिपीठ
पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव सती के मृत देह को लेकर तांडव करने लगे थे। तब भगवान विष्णु ने सृष्टि को बचाने के लिए अपना सुदर्शन चक्र चलाया और सती के शरीर को खंड-खंड कर गिरा दिया। उस समय जिन स्थानों पर सती के अंग गिरे, वे सभी स्थल शक्तिपीठ बन गए। ऐसे शक्तिपीठ 52 हैं और उन्हीं में से एक शक्तिपीठ है त्रिपुरा सुंदरी। मां की मूर्ति के पीछे पीठ पर 42 भैरवों और 64 योगिनियों की बहुत ही सुंदर मूर्तियां अंकित हैं। वहीं गृभगृह में देवी के विविध अस्त्र-शस्त्रों से युक्त अठारह भुजाओं वाली श्यामवर्णी आकर्षक मूर्ति है। 
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त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में वसुंधरा राजे - फोटो : Social Media
पीएम से सीएम तक लगा चुके हैं मां के दरबार में हाजिरी
कहा जाता है कि इस मंदिर में जो भी मनोकामना मांगी जाती है, उसे माता जरूर पूरी करती हैं। इसकी महत्ता के चलते ही देश के कई बड़े नेता मंदिर में मां के सामने शीश नवाने पहुंच चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी, हरिदेव जोशी, अमित शाह, वसुंधरा राजे, अशोक गहलोत सहित कई बड़े नेताओं ने त्रिपुरा सुंदरी के दरबार में मत्था टेका था। पूर्व सीएम वसुंधरा राजे भी अक्सर इस मंदिर में आती हैं। 

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त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में अमित शाह - फोटो : Social Media
अटल बिहारी से जुड़ा रोचक किस्सा
1982 में अटल बिहारी वाजपेयी ने भी त्रिपुरा मंदिर में मां के दर्शन किए थे। तब उन्होंने यहां के पंडित से पूछा कि मंदिर का नाम त्रिपुरा सुंदरी किसने किया क्योंकि इस मंदिर का नाम तो त्रिपुर सुंदरी मंदिर है। तब पंडित ने उन्हें बताया कि स्थानीय लोगों के बोलते-बोलते अपभ्रंश हो गया। अब लोग इसे त्रिपुरा सुंदरी मंदिर कहते हैं। तब अटल बिहारी वाजपेयी ने इस मंदिर को त्रिपुर सुंदरी कहने को कहा था।
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लाइट से मंदिर की गई आकर्षक सजावट - फोटो : Social Media
ऐसे तो इस मंदिर में हर रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं लेकिन नवरात्र में भक्तों का बड़ी भीड़ उमड़ती है। नवरात्र में मंदिर परिसर को आकर्षक रूप से सजाया जाता है और माता की विशिष्ट पूजा-अर्चना की जाती है। यहां दोनों नवरात्र के दिनों में धार्मिक आयोजन होते हैं। गरबा, डांडिया समेत कई प्रकार के नृत्य और दुर्गा पाठ के आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही दीवाली पर यहां मेले का आयोजन किया जाता है। 
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