पारदेश्वर महादेव मंदिर।
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आध्यात्मिक दृष्टि से भी इसकी महत्ता अनंत है
पारा न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी इसकी महत्ता अनंत है। तापमापी यंत्र (थर्मामीटर) से लेकर दवाओं तक, पारा एक संवेदनशील और उपयोगी धातु है। पारद शिवलिंग का निर्माण चांदी और औषधीय जड़ी-बूटियों को मिलाकर किया जाता है। इसे केवल संन्यासी संत ही बना सकते हैं, गृहस्थों को इसकी अनुमति नहीं होती। महामंडलेश्वर स्वामी जगदीश पुरी महाराज बताते हैं कि पारद शिवलिंग में त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का वास होता है। इसे स्पर्श, पूजन और अभिषेक करने से व्यक्ति पर किसी भी प्रकार का तांत्रिक या नकारात्मक प्रभाव नहीं होता। यह शिवलिंग मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है।
इस शिवलिंग को सिद्ध संत स्वामी नारदा नंद महाराज द्वारा महाकाल की नगरी उज्जैन में शास्त्रीय विधि से निर्मित किया गया। अमर निरंजनी आश्रम के स्वामी महामंडलेश्वर जगदीश पुरी महाराज के विशेष आग्रह पर इसे 18 फरवरी 2023 को उज्जैन से शक्करगढ़ लाया गया और 22 फरवरी को भव्य प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में स्थापित किया गया। तभी से यह स्थान श्रद्धालुओं की आस्था का मुख्य केंद्र बन गया है। सावन का महीना शिवभक्तों के लिए अत्यंत पूजनीय होता है और इस अवसर पर पारद शिवलिंग के दर्शन एवं अभिषेक का विशेष महत्व होता है। यहां मुंबई, अहमदाबाद, जयपुर, जोधपुर, अजमेर, कोटा, सूरत, ब्यावर समेत दूर-दराज से हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन आकर दर्शन एवं पूजन कर रहे हैं। सावन के प्रत्येक सोमवार को यहां विशाल जनसमूह की उपस्थिति से मेले का दृश्य बन जाता है।
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