सलीम चिश्ती
- फोटो : अमर उजाला
अमेरिका में रहने वाले जमीर हुसैन के बेटे सैयद समीर हुसैन ने कह कि मेरे पापा का न एफआईआर में नाम था, न किसी फोटोग्राफ में उनकी भूमिका थी। इसके बावजूद उन्हें जेल में रहना पड़ा। हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत देकर साबित कर दिया कि हिंदुस्तान के कानून में देर हो सकती है, लेकिन अंधेर नहीं है। वहीं, जेल से बाहर निकलते समय आरोपी जमीर चिश्ती मीडिया से बदतमीजी और गाली-गलौज करते हुए कैमरे में कैद हो गए।
क्या था मामला
दरअसल, 1992 में हुआ यह कांड एक व्यापारी के बेटे के साथ हुए कुकर्म के बाद शुरू हुआ था। उसकी अश्लील फोटो के आधार पर आरोपियों ने उसकी गर्लफ्रेंड को पोल्ट्री फार्म बुलाकर दुष्कर्म किया और उसकी न्यूड फोटो ले ली। वहीं, इस फोटो को वायरल करने की धमकी देकर उसकी सहेलियों को बुलाया गया। यह सिलसिला दर्जनों लड़कियों तक पहुंचा। आरोपियों ने कैमरे की रील को डेवलप करने के लिए एक लैब में दी थी, जहां के कर्मचारी की नियत बिगड़ गई और उसके माध्यम से फोटो सार्वजनिक हो गए। बताया जाता है कि ये फोटो जिनके हाथ में आए, उन्होंने लड़कियों को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।