जिस बेटी को माता-पिता वकील बनाना चाहते थे, उसने ब्रह्मांड सुंदरी बनकर इतिहास रच दिया। मोहाली से लेकर चंडीगढ़ तक उसकी कामयाबी के गीत गाए जा रहे हैं। परिजनों को बधाई देने वालों का तांता लगा है। सबकी जुबां पर हरनाज संधू का ही नाम है। पड़ोसी, रिश्तेदार ही नहीं, उसके शिक्षक भी खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं। पिता परमजीत सिंह संधू भावुक होते हुए बोले- मुझे अपनी हरनाज पर गर्व है। उसने देश को गौरवान्वित होने का मौका दिया है। हरनाज की मां डॉ. रबिंदर कौर संधू ने बताया कि वह हमेशा परिवार की लाडली रही है। उसे जो करना होता था हमने उसे कभी नहीं रोका। हम लोग मूलरूप से गुरदासपुर के बटाला के रहने वाले हैं। हरनाज पूरे खानदान में 16-17 भाइयों की इकलौती लाडली बहन है। हम चाहते थे कि वह वकील बने लेकिन उसने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में ही अपनी मास्टर डिग्री करनी चाही थी। हमने उसे कभी किसी चीज के लिए नहीं रोका।