गाखल धालीवाल स्कूल में बना बैडमिंटन कोर्ट।
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2003 में गाखल धालीवाल के सरकारी स्कूल में थे 6 कंप्यूटर, आज हैं 26 स्मार्ट क्लास रूम
दिल्ली का शिक्षा मॉडल पंजाब में लागू करने के बजाय स्कूलों पर ध्यान दिया जाए तो पंजाब शिक्षा स्तर में नंबर वन रहेगा। जालंधर के गांव गाखल धालीवाल में 1968 में स्कूल को सरकारी कर दिया गया था और सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्मार्ट स्कूल गाखल धालीवाल नाम रखा गया। इसके संस्थापक मास्टर गुरबंता सिंह थे। स्कूल 608 बच्चों के लिए शिक्षा का मंदिर है, जिसे एनआरआई फंड से संवारा गया।
प्रिंसिपल ललित मोहन और स्टेट अवार्डी अध्यापक कुलविंदर सिंह गाखल ने बताया कि हम दशकों से स्मार्ट हैं। जब कहीं कंप्यूटर नहीं थे तब 2003 में स्कूल में 6 कंप्यूटर थे। आज बच्चों को टैबलेट से पढ़ाते हैं। स्कूल में 24 स्मार्ट रूम में हैं। इनमें 1 लाइब्रेरी, कंप्यूटर रूम, फिजिक्स-केमिस्ट्री और बॉयो तीनों की अलग-अलग लैब, एनएस हेल्थ केयर लैब, स्मार्ट बैडमिंटन कोर्ट, बॉस्केटबाल कोर्ट, गाइडेंस काउंसलिंग रूम और सिक्योरिटी लैब हैं। स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद का पूरा ध्यान रखा जाता है। आज इसी स्कूल में कभी छात्र रहे कुलविंदर सिंह गाखल अध्यापक हैं और उन्हें बेहतर शिक्षा प्रदान करने के लिए स्टेट अवार्ड भी मिल चुका है।