लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में 26-27 सितंबर की रात अफवाह के बाद हिंसा हुई। हिंसा के बीच कैंपस में बाहरी लोग दाखिल हुए थे। नकाबपोश युवाओं ने कैंपस में लूटपाट और तोड़फोड़ की। बड़ा सवाल यह है कि चेहरा ढककर तोड़फोड़ करने वाले लोग कौन थे?
लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में 26-27 सितंबर की रात सोशल मीडिया पर फैली एक कथित यौन अपराध की खबर ने ऐसा बवाल खड़ा किया कि कुछ ही घंटों में मामला छात्र आक्रोश से निकलकर हिंसा, तोड़फोड़, आगजनी, पुलिस से टकराव और लूटपाट के आरोपों तक पहुंच गया। अब इस पूरे घटनाक्रम की जांच में एक नया और बेहद महत्वपूर्ण सवाल सामने आया है क्या हिंसा के बीच कुछ ऐसे लोग भी कैंपस में दाखिल हुए थे, जो विद्यार्थी नहीं थे? यह सवाल महज राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गया है।
सोमवार को पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने एलपीयू का दौरा करने के बाद कहा कि पुलिस को वॉकी-टॉकी मिले हैं और बाहरी लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
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लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में बवाल और आगजनी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उन्होंने यह भी बताया कि वायरल सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है, जिसमें कुछ पुरुषों के महिला छात्रावास के नजदीक पहुंचने की बात सामने आई है। हालांकि पुलिस ने अभी यह निष्कर्ष नहीं दिया है कि इन लोगों ने हिंसा करवाई या किसी राजनीतिक संगठन से उनका संबंध था।
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लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में बवाल और वाहनों में तोड़फोड़
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हिंसा के दौरान सामने आए वीडियो और तस्वीरों ने जांचकर्ताओं का ध्यान उन युवकों की ओर खींचा है जिनके चेहरे कपड़े से ढके दिखाई दे रहे हैं। कुछ दृश्यों में लोगों के हाथों में डंडे दिखाई देते हैं और कुछ लोग तोड़फोड़ करते नजर आते हैं।
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एलपीयू कैंपस में नकाबपोश
- फोटो : वीडियो ग्रैब
भीड़ का फायदा उठाकर बाहर से आए थे नकाबपोश?
यही वह बिंदु है जहां पुलिस की जांच अब यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि चेहरा ढकने वाले लोग वास्तव में एलपीयू के छात्र थे या भीड़ का फायदा उठाकर बाहर से आए थे।
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लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में बवाल और आगजनी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पहचान की पुष्टि सीसीटीवी, प्रवेश-निकास रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन, प्रत्यक्षदर्शियों और गिरफ्तारियों के बाद की पूछताछ से ही हो सकती है। हिंसा के दौरान एलपीयू के यूनिमॉल और अन्य परिसरों से सामान उठाए जाने के वीडियो भी सामने आए हैं।
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लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में बवाल और आगजनी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कुछ वीडियो में लोग दुकानों से खाद्य सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक सामान उठाते दिखाई देते हैं। यहीं से जांच का दूसरा बड़ा सवाल पैदा होता है क्या यह केवल बेकाबू छात्र भीड़ थी या हिंसा के बीच अलग-अलग समूहों ने लूटपाट का फायदा उठाया?
कहां गया सामान?
अगर लैपटॉप, मोबाइल और दूसरे महंगे सामान वास्तव में हॉस्टलों और दुकानों से बाहर ले जाए गए हैं, तो पुलिस के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि सामान कहां गया, किसने निकाला और किन रास्तों से कैंपस के बाहर पहुंचाया गया।
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लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में बवाल, छात्रों को रोकती पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यानी अब जांच केवल यह नहीं रहेगी कि किसने पत्थर चलाया और किसने गाड़ी तोड़ी, बल्कि यह भी होगी कि किसने सामान उठाया, किसने बाहर पहुंचाया और क्या इन घटनाओं के पीछे पहले से कोई समन्वय था? जिस तरह से लूटपाट की गई है और एलपीयू को तहस-नहस किया गया है उससे साफ है कि एक सुनियोजित भीड़ यूनिवर्सिटी के भीतर घुसी और मॉल्स में लूटपाट की।
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लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में बवाल और तोड़फोड़
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
डीजीपी ने कहा है कि बाहरी लोगों की भूमिका की जांच जारी है। यही कारण है कि अब विशेष जांच दल की जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा पहचान और घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ना बन गया है।
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लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में बवाल, विरोध में छात्र
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पूरे घटनाक्रम की शुरुआत सोशल मीडिया पर फैली उस खबर से हुई जिसमें एक छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म की बात कही गई। पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपों को अपुष्ट बताया और विश्वविद्यालय ने इन्हें भ्रामक तथा अफवाह करार दिया।
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लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में बवाल और वाहनों में तोड़फोड़
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसके बाद छात्रों का आक्रोश बढ़ता गया। रविवार को प्रदर्शन हिंसक हो गया। कैंपस में तोड़फोड़ हुई, वाहनों को नुकसान पहुंचा और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। जालंधर-फगवाड़ा मार्ग पर भी लंबा जाम रहा। पुलिस के मुताबिक स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी बल तैनात किया गया। अब कैंपस में दो हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।
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लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में बवाल और तोड़फोड़
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
डीजीपी गौरव यादव ने साफ किया है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ संयम बरता, लेकिन कानून हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। अब पुलिस के सामने कम से कम पांच बड़े सवाल हैं पहला, अफवाह की शुरुआत आखिर किस सोशल मीडिया खाते या समूह से हुई?
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लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में बवाल के बाद हाईवे किया जाम
- फोटो : पीटीआई
दूसरा, महिला छात्रावास के आसपास दिखाई देने वाले लोग कौन थे? तीसरा, वॉकी-टॉकी किसके पास थे और उनका इस्तेमाल क्यों किया गया? चौथा, चेहरा ढककर तोड़फोड़ करने वाले लोग कौन थे? और पांचवां, यूनिमॉल और कैंपस से उठाया गया सामान कहां गया? इन सवालों के जवाब मिलने पर ही यह स्पष्ट होगा कि हिंसा अचानक बेकाबू हुई या भीड़ के भीतर अलग-अलग समूहों ने हालात का फायदा उठाया। इस पूरे मामले का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि 30 सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जालंधर में बड़ी भाजपा रैली प्रस्तावित है।
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एलपीयू कैंपस में नकाबपोश
- फोटो : वीडियो ग्रैब
रैली के लिए जालंधर-फगवाड़ा राजमार्ग के पास बड़े स्तर पर तैयारियां की गई हैं और भाजपा ने हजारों कार्यकर्ताओं तथा बसों के पहुंचने की व्यवस्था की है। एलपीयू भी इसी जालंधर-फगवाड़ा मार्ग पर स्थित है और रैली स्थल से कुछ ही दूरी पर। यही भौगोलिक निकटता अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई है।
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लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में बवाल में घायल पुलिसकर्मी
- फोटो : पीटीआई
भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने आरोप लगाया है कि एलपीयू में हुई हिंसा के पीछे आम आदमी पार्टी सरकार की साजिश हो सकती है और इसका उद्देश्य अमित शाह की 30 सितंबर की रैली को प्रभावित करना हो सकता है।
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लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में आगजनी
- फोटो : पीटीआई
ऐसे आरोपों को राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए, जब तक जांच एजेंसियां इनके समर्थन में ठोस साक्ष्य सामने न रखें। इस मामले में एलपीयू के चांसलर अशोक मित्तल की राजनीतिक भूमिका को लेकर भी चर्चा हो रही है।
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लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में आगजनी
- फोटो : पीटीआई
मित्तल को 2022 में आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा भेजा था और अप्रैल 2026 में वह भाजपा में शामिल हो गए। मित्तल अब भाजपा के राज्यसभा सांसद हैं और एलपीयू के चांसलर भी हैं।
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लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में बवाल के बाद हाईवे किया जाम
- फोटो : पीटीआई
अगस्त में दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने पंजाब में भाजपा की आगामी राजनीतिक गतिविधियों और अमित शाह की प्रस्तावित बड़ी रैली को लेकर भी बात की थी। इसलिए एलपीयू की हिंसा और अमित शाह की रैली के बीच राजनीतिक बहस होना स्वाभाविक है लेकिन राजनीतिक संयोग और आपराधिक साजिश इन दोनों के बीच फर्क जांच से ही तय होगा।
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लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में तोड़फोड़
- फोटो : ANI
किसने पुलिस की गाड़ी पर हमला किया?
एलपीयू का मामला अब केवल यह पता लगाने तक सीमित नहीं है कि अफवाह किसने फैलाई। असली जांच अब उस भीड़ की परतें खोलने की है जो अफवाह के बाद कैंपस में जमा हुई। कौन छात्र था? कौन बाहरी था? किसके हाथ में डंडा था? किसके पास वॉकी-टॉकी था? किसने दुकान का सामान उठाया? किसने पुलिस की गाड़ी पर हमला किया? किसने आग लगाई? और सबसे अहम क्या इन अलग-अलग घटनाओं के बीच कोई आपसी संपर्क था?
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लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में तैनात पुलिस
- फोटो : ANI
इन सवालों के जवाब सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डेटा, प्रवेश-निकास रिकॉर्ड, बरामद सामान और गिरफ्तार आरोपियों की पूछताछ से निकलेंगे। फिलहाल इतना जरूर साफ है कि एक अफवाह ने हजारों छात्रों के गुस्से को जन्म दिया, लेकिन उसके बाद हुई हिंसा में शामिल हर व्यक्ति को केवल ‘छात्र’ मान लेना जांच को अधूरा छोड़ देगा।
एलपीयू में नकाब पहनकर कौन आया था? जांच अगर इस सवाल का जवाब ढूंढ लेती है, तो 26-27 सितंबर की रात हुई हिंसा की पूरी तस्वीर बदल सकती है। हालांकि स्पेशल डीजीपी प्रवीण सिन्हा का कहना है कि वॉकी-टॉकी वाले सेना के जवान थे जिनके बच्चे एलपीयू में पढ़ रहे हैं। वह अपने वॉकी-टॉकी के साथ ही एलपीयू आ पहुंचे थे।