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Narendra Chanchal News: रोचक है भजन सम्राट नरेंद्र चंचल की फिल्मी एंट्री, यूं फिदा हुए थे राज कपूर, मिला था 'बॉबी' का ऑफर

Fri, 22 Jan 2021 05:08 PM IST
निवेदिता वर्मा अशोक नीर, संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
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नरेंद्र चंचल भजन सम्राट: बाबा नकोदर शाह के दरबार में नरेंद्र चंचल। - फोटो : फाइल फोटो
पंजाब के अमृतसर की ऐतिहासिक नमक मंडी की शिव गली (कुत्तों वाली गली) से शुरू हुआ भजन गायक नरेंद्र चंचल का सफर बहुत ही संघर्षों से भरा रहा। चंचल पंजाब के पहले भजन गायक थे, जिन्होंने जागरण में मां की भेंटों के बीच बाबा बुल्ले शाह के कलाम को जोड़ा और गाया। नरेंद्र चंचल का खुले पंडालों में मां की भेंट गाने का अंदाज इतना अलग और दिल को छू लेने वाला था कि जल्दी ही उनकी गायन शैली पूरे पंजाब में प्रसिद्ध हो गई। इसी शैली ने उन्हें बॉलीवुड में एंट्री दिला दी। 
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नरेंद्र चंचल भजन सम्राट - फोटो : फाइल फोटो
1970 के दशक में नरेंद्र चंचल जागरण करने के लिए मुंबई गए तो वहां भी उन्होंने भेंटों के बीच बाबा बुल्ले शाह का कलाम गाया। इस दौरान वहां उपस्थित राज कपूर को उनका यह अंदाज बहुत अच्छा लगा। जब जागरण संपन्न हुआ, तो राज कपूर ने चंचल को अपनी आने वाली फिल्म बॉबी के लिए एक गीत के लिए साइन कर लिया। बॉबी में चंचल ने बाबा बुल्ले शाह के कलाम को जिस अंदाज से गाया जो बहुत हिट हुआ था। इसी गाने पर उन्हें अपना पहला फिल्म फेयर अवार्ड भी मिला। 

 
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नरेंद्र चंचल भजन सम्राट - फोटो : फाइल फोटो
इसके बाद चंचल देश भर में जहां भी जागरण के लिए जाते, लोग उन्हें बाबा बुल्ले शाह का यह कलाम गाने के लिए कहते थे। चंचल ने अमिताभ बच्चन की फिल्म बेनाम में भी एक गीत गाया था। उससे उनकी शोहरत में चार चांद लग गए। अभिनेता मनोज कुमार की फिल्म रोटी-कपड़ा और मकान में मंहगाई मार गई गीत आज भी लोगों की जुबान पर है। 
 

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नरेंद्र चंचल भजन सम्राट - फोटो : फाइल फोटो
जब रूस में बॉबी फिल्म रिलीज की गई तो राज कपूर चंचल को भी अपने साथ ले गए थे। यह उनकी पहली विदेश यात्रा थी। बाद में एक इंटरव्यू में चंचल ने बताया था कि इसके बाद वह अमेरिका भी गए थे। वहां की संगत ने उन्हें भगवती जागरण में बुलाया था। चंचल बताते थे कि विदेशी दौरों के बाद वह आर्थिक रूप से संपन हो गए थे। दिल्ली में घर बनाने के बाद भोपाल, इंदौर और उत्तरप्रदेश के कई शहरों से जागरण के न्योते मिलने लगे थे। 
 
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नरेंद्र चंचल भजन सम्राट - फोटो : फाइल फोटो
नरेंद्र चंचल का बॉलीवुड का यह सफर आसान नहीं था। चंचल ने 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात जवानों के हौसले बुलंद करने के लिए कई बार गीत गाए। सर्दियों में वह गुरुनगरी की धार्मिक कमेटियों द्वारा आयोजित जागरण में देर रात तक गाते थे। 1972 में उनकी शादी घर के नजदीक ही रहने वाली नम्रता के साथ हुई थी। शादी के बाद उनका सितारा चमकना शुरू हो गया। उन्हें दिल्ली की धार्मिक कमेटियों द्वारा जागरण के लिए बुलाया जाने लगा। तीन बच्चों सिद्धार्थ, कपिला और मोहित की परविश में नम्रता से मिले सहयोग से नरेंद्र चंचल ने जल्दी ही दिल्ली की धार्मिक संस्थाओं के बीच अपनी पैठ बना ली थी।
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