वाघा सीमा पर पाकिस्तान गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष भाई सतवंत सिंह व उनके साथियों ने सिख संगत के साथ नगर कीर्तन का स्वागत किया। वाघा सीमा से नगर कीर्तन गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब के लिए रवाना हो गया। पाकिस्तान सरकार ने नगर कीर्तन में शामिल होने के लिए 1217 श्रद्धालुओं को वीजा जारी किए हुए थे। देश के अलग-अलग राज्यों की संगत इस नगर कीर्तन में शामिल हुई।
28 अक्तूबर से दिल्ली से चला यह नगर कीर्तन सुल्तानपुर लोधी, श्री अमृतसर साहिब से होता हुआ तीन दिन बाद अटारी सड़क सीमा पर पहुंचा। नगर कीर्तन में शामिल श्रद्धालु गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब, गुरुद्वारा श्री पंजा साहिब और गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के दर्शन करेंगे। परमजीत सिंह सरना को पाकिस्तान जाने से रोक देने पर अटारी सीमा पर नगर कीर्तन की अगुवाई हरविंदर सिंह सरना ने की।
नगर कीर्तन में शामिल श्रद्धालु सुबह-सवेरे ही अटारी सड़क सीमा पर पहुंचे। आईसीपी में इन श्रद्धालुओं के दस्तावेजों की जांच की विशेष व्यवस्था की हुई थी। दस्तावेजों की जांच पूरी होने के साथ ही कई श्रद्धालु अटारी सड़क सीमा से पाकिस्तान रवाना हो गए। जब श्रद्धालु पाकिस्तान में प्रवेश कर रहे थे, उस समय सीमावर्ती इलाकों में स्मॉग की चादर बिछी हुई थी।
इससे पहले नगर कीर्तन बुधवार रात अमृतसर पहुंचा। गुरुवार सुबह नगर कीर्तन श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचा जहां अरदास हुई। श्री हरमंदिर साहिब के ग्रंथी ज्ञानी बलविंदर सिंह ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पावन स्वरूप पालकी साहिब में सुशोभित करने की सेवा निभाई।
नगर कीर्तन रवाना करने से पहले ज्ञानी बलविंदर सिंह और एसजीपीसी के चीफ सेक्रेटरी डॉ. रूप सिंह ने पंज प्यारों और निशानची साहिब को सिरोपा भेंट किया। एसजीपीसी ने भी नगर कीर्तन के स्वागत में रेड कारपेट बिछाया था। टाउन हॉल के नजदीक पंजाब पुलिस की एक महिला टुकड़ी ने नगर कीर्तन को सलामी दी।
सिखों का इतिहास किसी सरकार से न मांगने का है: मान
नगर कीर्तन में शामिल हुए शिअद (अमृतसर) के अध्यक्ष सिमरनजीत सिंह मान ने कहा कि पाकिस्तान सरकार ने करतारपुर साहिब कॉरिडोर के लिए जो 20 डॉलर की फीस रखी है, वह श्रद्धालु अपनी जेब से भरेंगे। सिखों का इतिहास सरकारों से कुछ भी न मांगने वाला रहा है।
सुखबीर बादल पर तंज कसते हुए मान ने कहा कि उन्हें इतिहास की जानकारी नहीं है, इसलिए सरकारों से 20 डॉलर की फीस भरने की मांग कर रहे हैं। जब मान अटारी सीमा पर पहुंचे, तो वहां तैनात पंजाब पुलिस के बैंड ने उन्हें सलामी दी। इससे खुश होकर मान ने पंजाब पुलिस के बैंड को 1100 रुपये की राशि भेंट की।
दिल्ली से गुरुद्वारा ननकाना साहिब तक नगर कीर्तन की अगुवाई कर रहे शिअद (दिल्ली) के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना को अटारी सीमा पर स्थित इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (आईसीपी) में तैनात इमिग्रेशन अधिकारियों ने पाकिस्तान जाने से रोक दिया। इमिग्रेशन अधिकारियों के अनुसार सरना के खिलाफ 2008 में धारा 420 के अंतर्गत एक मामला दर्ज है। सरना के विरुद्ध दिल्ली पुलिस ने एक लुकआउट नोटिस जारी किया हुआ है।
इसी नोटिस के आधार पर सरना को आईसीपी में रोका गया। परमजीत सरना के भाई हरविंदर सिंह सरना ने अटारी सड़क सीमा पर मीडिया को बताया कि जिस केस का हवाला देकर उनके भाई को पाकिस्तान जाने से रोका गया है, वह सात साल पुराना है। इसके बाद परमजीत सरना कई बार विदेश की यात्रा कर चुके हैं। उन्हें देश के किसी भी हवाई अड्डे पर नहीं रोका गया।
2008 के बाद परमजीत सरना कई बार पाकिस्तान भी जा चुके हैं। उनके भाई जब भी पाकिस्तान गए हैं, उन्होंने अटारी सड़क सीमा से ही पाकिस्तान में प्रवेश किया है। तब किसी इमिग्रेशन अधिकारी ने उन्हें पाकिस्तान जाने से नहीं रोका। अब जबकि उनके भाई श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर सजाए गए नगर कीर्तन की अगुवाई कर रहे हैं, तब उन्हें पाकिस्तान न जाने देना एक साजिश है।
सरना ने अमर उजाला को बताया कि उन्हें पाकिस्तान जाने से रोकना बादल परिवार की साजिश है। नगर कीर्तन को संगत ने जितना प्यार दिया है, उसको देखकर बादल परिवार बौखलाहट में आ गया है। बादल परिवार की इस साजिश में भाजपा भी शामिल है। सरना ने कहा कि जब वह आईसीपी में पहुंचे, तब इमिग्रेशन अधिकारियों ने बता दिया कि दिल्ली से फोन आया है कि सरना को पाकिस्तान जाने से रोक दिया जाए।
सरना ने तल्खी भरे अंदाज में कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को केदारनाथ की यात्रा करने से रोक दिया जाए, तब मोदी और अमित शाह किससे अपील करेंगे। सरना ने कहा कि वह 15 दिन पहले ही पाकिस्तान की यात्रा में गए थे। नगर कीर्तन के सभी प्रबंध कर लौटे थे। उस समय उन्हें नहीं रोका गया। वह अपने व्यापारिक दौरों में कई बार विदेश गए हैं। उसे किसी भी हवाई अड्डे में नहीं रोका गया।
इसके बाद सरना अमृतसर लौट आए हैं। नगर कीर्तन में शामिल संगत को जब इस बात की जानकारी मिली कि सरना उनके साथ नहीं जा रहे, तो उनमें रोष व्याप्त हो गया।