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पर्थ में ऐतिहासिक खेल के बाद क्यों हारी टीम इंडिया, 5 कारण

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रोहित शर्मा (नाबाद 171) के शानदार शतक और विराट कोहली (91) के साथ दूसरे विकेट के लिए हुई दोहरी शतकीय साझेदारी के दम पर टीम इंडिया ने पर्थ में पहली बार मेजबान ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 300 से ज्यादा का स्कोर किया और ऐसा लग रहा था कि भारत यह मैच जीतकर सीरीज में 1-0 की बढ़त बना लेगी, लेकिन यह नहीं हो सका। बल्लेबाजों ने शानदार खेल दिखाया तो कहां पर हुई चूक जिसने भारत को हार दिलाई। जानते हैं 5 अहम कारण।
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पर्थ में ऐतिहासिक खेल के बाद क्यों हारी टीम इंडिया, 5 कारण

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पहला कारण, भारत की हार में ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीवन स्मिथ की दिलकश शतकीय पारी का अहम योगदान रहा। वह भारत के खिलाफ लगातार बड़े स्कोर करते रहे हैं। पर्थ में भी अंतिम ओवर में जब वह आउट हुए तब तक 149 रन बना चुके थे और जीत से सिर्फ 2 रन दूर थी। उन्होंने भारत के खिलाफ पिछली 10 अंतरराष्ट्रीय पारियों में नाबाद 162, नाबाद 52, 133, 28, 192, 14, 117, 71, 47 और 149 रन बनाए हैं। ऐसे में कप्तान धोनी को उन पर अंकुश लगाने का योजना बनानी थी जो कि नहीं दिखी।
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अपने पहले ही मैच में तेज गेंदबाज बरिंदर सरां ने भारत को शुरुआत में ही ऐरोन फिंच और डेविड वार्नर जैसे विस्फोटक बल्लेबाज को आउट कर दोहरी सफलता दिला दी थी लेकिन टीम के अन्य गेंदबाज इसे बनाए नहीं रख सके जो टीम इंडिया की हार का दूसरा मुख्य कारण रहा। स्टीवन स्मिथ और जॉर्ज बैली ने तीसरे विकेट के लिए 242 रनों की साझेदारी कर भारत को जीत से दूर कर दिया।

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तीसरा कारण, धोनी ने पर्थ जैसी तेज और उछाल भरी पिच पर भी 2 फिरकी गेंदबाजों के साथ उतरने का साहस दिखाया। हालांकि आज के मैच में ज्यादा बाउंस देखने को नहीं मिला लेकिन फिरकी गेंदबाज भारत को सफलता दिलाने में नाकाम रहे। आर अश्विन को 2 विकेट मिले लेकिन वो भी 42वें और 44वें ओवर में और तब तक काफी देर हो चुकी थी।
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चौथा कारण, मोहम्मद शमी के चोटिल होने पर तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार को हड़बड़ी में मैच से 2 दिन पहले ही टीम में शामिल किया गया और पहले ही मैच में उतार भी दिया। बावजूद इसके उन्होंने कीफायती गेंदबाजी (9 ओवर, 42 रन) की लेकिन विकेट नहीं झटक पाना टीम पर भारी पड़ा। भुवी के अलावा तेज गेंदबाज उमेश यादव 10 ओवर में 54 रन देकर एक भी सफलता हासिल नहीं कर सके। बरिंदर सरां को छोड़कर भुवी और उमेश की विकेटलेस रहे जो नुकसानदेह साबित हुआ।  
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पांचवां कारण, पर्थ में भारत ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया को 300 से ज्यादा यानी 310 रनों का लक्ष्य दिया लेकिन इस बड़े से स्कोर को रोक पाने में भारतीय आक्रमण नाकाम साबित हुआ। इस पिच पर जहां तेज गेंदबाजी का जलवा दिखता रहा है वहां पर कप्तान धोनी ने फिरकी गेंदबाजों पर दांव खेला और 3 तेज गेंदबाज तथा 2 फिरकी गेंदबाज के साथ मैच में उतरे। इस मैच में एक तेज गेंदबाज की कमी खली।
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