टीम इंडिया ने सिडनी टी-20 में अंतिम गेंद पर सुरेश रैना के बल्ले से निकले चौके की बदौलत शानदार जीत हासिल करते हुए क्लीन स्विप भी कर लिया। भारत ने इस मैच में 198 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए यह जीत अपने नाम किया। यह जीत कोई मामूली जीत नहीं है। इस वर्ल्ड रिकॉर्ड जीत में धाकड़ बल्लेबाज युवराज सिंह का भी गजब का 'संयोग' है।
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टीम इंडिया की वर्ल्ड रिकॉर्ड जीत में युवराज सिंह का 'संयोग'
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भारत ने तीसरी बार टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में 190 या उससे ज्यादा के लक्ष्य को हासिल किया है। यह ऐसा करने वाली पहली टीम भी बन गई है जिसने 190 से ज्यादा के लक्ष्य को 3 बार पा लिया। भारत से पीछे दक्षिण अफ्रीका की टीम है जिसने टी-20 में 2 बार यह कारनामा किया है।
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भले ही धोनी की टीम ने बड़े लक्ष्य का सफलतापूर्वक पीछा करने का नया रिकॉर्ड सिडनी में बना दिया हो लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है जब टीम इंडिया ने अंतिम गेंद पर विजयी रन बनाया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंतिम गेंद में जीत हासिल करने की घटना 15 बार हो चुकी है जिसमें भारत की ओर से पहली बार ऐसा किया गया है।
टीम इंडिया की वर्ल्ड रिकॉर्ड जीत में युवराज सिंह का 'संयोग'
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भारत ने सिडनी टी-20 से पहले जिन 2 और मौकों पर 190 से ज्यादा का लक्ष्य हासिल कर लिया है वो 200 से ज्यादा का लक्ष्य था। 2009 में मोहाली में श्रीलंका ने भारत के सामने 207 रनों का लक्ष्य रखा जिसे उसने 5 गेंद शेष रहते जीत लिया। इस मैच में भी युवराज सिंह नाबाद रहे और 25 गेंदों में 60 रनों की नाबाद पारी खेली, साथ ही 3 चौके और 5 छक्के भी लगाए। वह मैन ऑफ द मैच भी बने। युवी ने छक्का लगाकर मैच जीताया था।
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टीम इंडिया ने 10 अक्टूबर, 2013 को दूसरी बार 200 से ज्यादा का लक्ष्य ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हासिल किया। राजकोट में 202 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत ने 2 गेंद शेष रहते 6 विकेट से जीत हासिल कर लिया। इस मैच में भी युवराज सिंह नाबाद रहे और 35 गेंदों में 8 चौके और 5 छक्के की मदद से अविजित 77 रनों की पारी खेली और मैन ऑफ द मैच बने।
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टीम इंडिया की वर्ल्ड रिकॉर्ड जीत में युवराज सिंह का 'संयोग'
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युवराज सिंह एक बड़े हिटर हैं ही और अंतिम मौकों पर बड़े शॉट खेलकर टीम को बड़ी जीत दिलाते रहे हैं। वह ऐसे ही टीम की जीत के ट्रंप कार्ड नहीं हैं। भारत के 3 बड़े लक्ष्य का पीछा करने में युवराज का अहम योगदान रहा है। सिडनी में भी वह अंतिम ओवर में छक्का जड़कर टीम को जीत के करीब ले गए थे।
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युवराज सिंह श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दो सौ से ज्यादा का लक्ष्य हासिल करने के मौकों पर क्रीज रहे और टीम को जीत दिलाने के बाद जीत के नायक भी बने। सिडनी में वह जीत के नायक तो नहीं बने लेकिन अंतिम ओवर की शुरुआती 2 गेंदों पर उन्होंने जो चौका और छक्का लगाया उसी ने टीम को जीत दिलाई। शानदार यह रहा कि लंबे इंतजार के बाद वह बल्लेबाजी को उतरे और खरे भी उतरे।