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दुर्योधन की 10 गलतियां जो पांडवों के लिए बन गईं वरदान

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दुर्योधन अगर ये दस गलतियां न करता तो शायद महाभारत का युद्ध न होता या होता तो पांडव विजयी न होते। जानिए कौन सी वो गलतियां थी जिन्होंने पांडवों को फायदा और दुर्योधन को नुकसान पहुंचाया।
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दुर्योधन की 10 गलत‌ियां जो पांडवों के ल‌िए बन गईं वरदान

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बचपन में दुर्योधन ने भीम को जहर खिलाकर उन्हें गंगा में फेंक दिया। गंगा में बहते बहते भीम नागलोक पहुंच गए। नागराज रिश्ते में भीम के नाना निकले जिन्होंने भीम को 100 हाथ‌ियों का बल दे द‌िया। महाभारत युद्ध में भीम इसी ताकत के चलते दुर्योधन पर भारी पड़े।
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दुर्योधन ने छल करके पांडवों को लाक्षागृह में मारने का प्रयास किया। लाक्षागृह से बचकर पांडव जंगल में जा पहुंचे जहां भीम को हिडिंबा मिल गई। हिंडिंबा से भीम को घटोत्कच पुत्र प्राप्त हुआ जिसने महाभारत में कौरव सेना में खलबली मचा दी।

दुर्योधन की 10 गलत‌ियां जो पांडवों के ल‌िए बन गईं वरदान

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दुर्योधन ने अपनी जिद के चलते हस्तिनापुर का विभाजन करवाया। पांडवों को खांडवप्रस्थ मिला जिसे पांडवों ने इंद्र की नगरी के समान बना द‌िया और इंद्रप्रस्थ नाम रखा। इसी इंद्रप्रस्थ में दुर्योधन को द्रौपदी के हाथों अपमान सहना पड़ा।
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द्रौपदी के हाथों अपमान का बदला लेने के लिए दुर्योधन ने द्यूत क्रीड़ा का आयोजन किया। जहां द्रौपदी के चीर हरण की घटना के कारण दुर्योधन ने कई राज पर‌िवारों का व‌िश्वास और साथ खो द‌िया और इसका लाभ पांडवों को म‌िला।
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दुर्योधन ने पांडवों को द्यूत क्रीड़ा में हराने के बाद उन्हें बारह साल के वनवास पर भेज दिया। ये वही दौर था जब बनवास में रहते हुए पांडवों ने अपनी शक्ति बढ़ाई। इतना ही नहीं अर्जुन ने इंद्र से द‌िव्याशस्त्र पाए जिसका उन्हें युद्ध में लाभ म‌िला।
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अज्ञातवास के अंत‌िम द‌िनों में कौरवों ने राजा व‌िराट के राज्य पर आक्रमण क‌िया जहां कौरवों का सामना वृहन्नलला बने अर्जुन से हुआ। वृहन्नलला ने अकेले ही पूरी कौरव सेना को परास्त कर द‌िया। इससे कौरव सेना के मनोबल में कमी आई ज‌िसका नुकसान कौरवों को महाभारत युद्ध में भी उठाना पड़ा।

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अज्ञातवास पूरा होने के बाद पांडवों ने श्री कृष्ण को सुलह के लिए अपना दूत बना कर हस्त‌िनापुर भेजा। लेकिन दुर्योधन ने श्री कृष्‍ण का अपमान किया और कृष्ण को बंदी बनाने का प्रयास तक कर डाला। इससे श्री कृष्‍ण नाराज हो गए और उसी समय कौरवों के व‌िनाश की नींव पड़ गई।

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श्री कृष्ण ने युद्ध टालने के लिए दुर्योधन को सुझाव दिया कि पांडवों को इंद्रप्रस्‍थ नहीं दे सकते तो कम से कम पांच गांव दे दें। लेकिन दुर्योधन ने कहा कि वो पांच गांव क्या एक सुई के बराबर जमीन भी पांडवों को ब‌िना युद्ध के नहीं देगा। दुर्योधन की इस ज‌िद ने कौरवों को नष्ट कर द‌िया और इन्हें पूरा हस्त‌िनापुर भी गंवाना पड़ा।

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नकुल सहदेव के मामा मद्र नरेश जब पांडवों की मदद करने आ रहे थे तब दुर्योधन ने छल से उन्हें अपना साथ देने के ल‌िए राजी कर लिया। मद्र नरेश कर्ण के सारथी बने। लेकिन वो पूरे युद्ध के दौरान कर्ण के साथ रहकर अर्जुन का गुणगान करते रहे और कर्ण का मनोबल गिराते रहे।
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कर्ण ने जो हथियार अर्जुन को मारने के लिए इंद्र से प्राप्त क‌िया था, दुर्योधन की जिद पर उसे उन्हीं हथियारों से घटोत्कच का वध करना पड़ा। इससे अर्जुन सुरक्षित हो गए और अंत में अर्जुन के हाथों कर्ण का वध हुआ और दुर्योधन महाभारत का युद्ध हार गया।
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