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पढ़िए, चेन्नई का छोरा कैसे बना गूगल का बॉस

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भारतवंशी पिचई सुंदरराजन को गूगल का नया सीईओ नियुक्त किया गया है। 43 वर्षीय सुंदर ने 2004 में गूगल से जुड़े थे। चेन्नई में जन्में पिचई की आरंभिक शिक्षा पद्म शेषाद्रि बाल भवन में हुई। आईआईटी खड्गपुर से बीटेक करने के बाद एमएस करने के लिए वह स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी चले गए। उन्होंने पेल्सिवेनिया यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री भी ले रखी है।
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गूगल के साथ जुड़ने से पहले सुंदर पिचई मैकिन्सकी एंड कंपनी के साथ बतौर प्रबंधन सलाहकार के तौर पर काम कर चुके हैं। इसके अलावा अप्लाईड मटेरियल्स में इंजीनियरिंग एंड प्रोडक्ट मैनेजमेंट के लिए भी काम किया है।
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साल 2004 में गूगल से जुड़ने के बाद उन्होंने उसके कई मशहूर उत्पादों के साथ काम किया जिसमें टूलबार, गूगल गियर और गूगल पैक मुख्य थे। इनकी सफलता को गूगल ने भी सराहा और इसके साथ ही उसको अहसास हुआ की कंपनी का खुद का ब्राउजर भी होना चाहिए।

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गूगल ने पिचई को 2008 में गूगल क्रोम और ऑपरेटिंग सिस्टम के निर्माण का काम सौंपते हुए उन्हें इसका वाइस प्रेसीडेंट बनाया। गूगल क्रोम ब्राउजर इस वक्त लगभग दुनिया के सभी कंप्यूटरों पर इस्तेमाल किया जा रहा है। 2012 में उन्हें क्रोम का सीनियर वाइस प्रसीडेंट बनाया गया।

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गूगल के साथ लगभग एक दशक बिताने के बाद उन्हें 2013 में उन्हें गूगल एंड्राइड का चीफ बनाया गया। गूगल के सह संस्थापक लैरी पेज को लगा कि वह एंड्राइड को गूगल में लाने वाले एंडी रुबिन के काम को तेजी से आगे बढ़ा सकते हैं।
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सुंदर पिचई को सैमसंग जैसे सहभागियों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने के लिए जाना जाता है। उन्होंने हाल ही में भारत में माइक्रोमैक्स, स्पाइस और कॉर्बन जैसे लोकल कंपनियों के साथ मिलकर 'एंड्राइड वन' को लॉन्च किया था।
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हाल ही में यह भी अफवाहें उठी की सुंदर पिचई माइक्रोसॉफ्ट के साथ जुड़ सकते हैं और उन्हें कंपनी का सीईओ बनाया जा सकता है। हालांकि, बाद में भारत में जन्में सत्या नडेला को माइक्रोसॉफ्ट का सीईओ बनाया गया।
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पिछले ही साल लैरी पेज ने पिचई को प्रमोट कर गूगल सर्च, मैप, गूगल+, कॉमर्स, एडवरटाइजिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे उत्पादों के कामकाज की जिम्मेदारी सौंपी। इसका मतलब यह था कि इन सभी उत्पादों के प्रमुख सुंदर को रिपोर्ट करेंगे। इसके साथ ही पिचई कंपनी में एक प्रमुख स्थान पर काबिज हो गए।

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