वैसे तो यह पाठ्यक्रम का हिस्सा था लेकिन आईआईटी बीएचयू के छात्रों ने इसे मानवता की मिसाल बना दी। छित्तूपुर की मीना देवी के लिए ये छात्र किसी फरिश्ते की तरह आए और उसकी सारी परेशानियां दूर करने में जुट गए। बीटेक कर रहे चार दोस्तों ने उनकी जिंदगी ही बदल दी। मीना पैरों से लाचार हैं और उनके पति का हाथ टूट गया था। ऐसे में इलाज तो दूर चूल्हा जलना भी मुश्किल था। (तबस्सुम/अमर उजाला, वाराणसी)
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आईआईटी बीएचयू के छात्रों ने किया कमाल, आपको भी होगा गर्व
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छात्रों ने मुफलिसी के दिन देख रहे इस बुजुर्ग दंपति को रोजाना खाना पहुंचाया और धीरे-धीरे पति को इस लायक बना दिया कि वे काम कर सकें। अब इस परिवार को किसी के मदद की दरकार नहीं है लेकिन उनके ये बच्चे लगातार उनकी देखभाल कर रहे हैं। डेवलपमेंट स्टडीज कोर्स के तहत पांच महीने पहले बीएचयू के पास के छित्तूपुर मुहल्ले में छात्रों को भेजा गया था। इसी दौरान कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग के छात्र शुभम जालान की मुलाकात मीना देवी से हुई। (फोटो- शुभम जैन)
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उसके घर की हालत देख उनसे रहा नहीं गया। हाथ-पैर से लाचार होने के साथ ही खाने पीने की भी मोहताजी थी। पति रिक्शा चलाकर बड़ी मुश्किल से जिंदगी काट रहे थे। ऐसे में उन्होंने उनकी मदद के लिए पहले तो अपने मेस से खाना ले जाकर उन्हें देना शुरू किया। शुभम जालान के साथ ही उनके क्लासमेट शुभम सोनी व पंकज सोनी के साथ सेरामिक इंजीनियरिंग की छात्रा भारती अग्रवाल भी इस नेक मुहिम में जुट गईं। मीना देवी के इलाज के लिए उन्होंने चंदा जुटाना शुरू किया। (फोटो- भारती अग्रवाल)
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फिर उन्हें बीएचयू अस्पताल ले आया गया। चूंकि 45 साल की मीना का वजन महज 20 किलो ही था, ऐसे में हाई डोज दवाओं को सहने की ताकत नहीं थी। इसके बाद उनकी इस मुहिम से जुड़ी आईआईटी निदेशक प्रो. राजीव संगल की डॉक्टर बेटी शेफाली संगल। आयुर्वेद की डॉ. शेफाली फिर इन छात्रों के साथ मीना के घर जाकर वहीं पर उनका इलाज करने लगीं। इसी बीच मीरा देवी के पति छोटे लाल जो रिक्शा चलाते थे, उनका भी एक्सीडेंट में हाथ टूट गया। इसके बाद छात्रों ने उनका भी इलाज कराया। (फोटो- पंकज सोनी)
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इसके साथ ही उन्होंने इस दौरान छोटे लाल का आधार कार्ड, राशन कार्ड बनवाने के साथ ही बैंक में अकाउंट भी खुलवा दिया। अब मीना देवी की सेहत में सुधार नजर आने लगा है। वो थोड़ी-बहुत चलने फिरने लगी हैं। छात्रों की कोशिशों को देखते हुए छोटे लाल ने भी अब फिर से बुनकरी का काम करने की ठानी है और उन्हें बजरडीहा में एक गद्दी पर काम भी मिल गया है। गद्दी पर जाने के लिए ये छात्र उन्हें साइकल दिलाने के साथ ही, उसके रिक्शे को किराए पर चलवाने की सलाह दी है ताकि और कुछ पैसे हाथ में आ सकें। खाने पीने का इंतजाम होता रहे इसके लिए छात्रों ने आईआईटी के सात्विक मेस में एक मुश्त पैसा भी जमा करने की सोची है। (फोटो- शुभम सोनी)