प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते छह महीने में कई देशों का दौरा करके ओबामा जैसे नेताओं से मुलाक़ात की है। हर दौरे में मोदी की भाव-भंगिमाएं चर्चा में रही हैं।
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क्या है पीएम मोदी की इस उंगली का राज?
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ख़ास तौर पर अगर उनकी तस्वीरों पर ग़ौर करें तो पाएँगे कि वो अपनी उंगली के इशारे से कई बातें कहते नज़र आते हैं। गुजरात दंगों के बाद से नरेंद्र मोदी को लेकर अमरीकी नेताओं के मन में खिंचाव रहा, पर प्रधानमंत्री बनने के बाद जब वह सितंबर में अमेरिका पहुंचे तो राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ उनकी कैमिस्ट्री अलग थी।
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प्रशंसकों की राय में वह भारत को विश्वशक्ति नहीं तो कम से कम दक्षिण एशिया के ऐसे देश के बतौर देखना चाहते हैं, जिसे महाशक्ति भी अनदेखा नहीं कर सकती। ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में हाल ही में औद्योगिक देशों का सम्मेलन जी-20 हुआ। इस दौरान मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री टोनी एबट के बीच दोस्ताना मुलाक़ात को मीडिया ने ऐतिहासिक का दर्जा दिया।
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यहां भी वह जताना नहीं भूले कि भारत को ऑस्ट्रेलिया नज़रंदाज़ नहीं कर सकता। जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी हल्के-फुल्के अंदाज़ में भी सब कुछ कह गए। सम्मेलन में उन्होंने काले धन और कर चोरी का मुद्दा ज़ोरदार तरीक़े से उठाया।
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जब दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संगठन यानी सार्क देशों का 18वां शिखर सम्मेलन नेपाल के काठमांडू में हुआ तो भारत को 'बिग ब्रदर' की तरह ही देखा गया। सार्क देशों के शासनाध्यक्षों को मोदी ने अपने ही अंदाज़ में ही फर्राटेदार अंग्रेज़ी में संबोधित किया।
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मोदी की बॉ़डी लैंग्वेज और उनके आत्मविश्वास पर पूरा शिखर सम्मेलन केंद्रित रहा। पाकिस्तानी मीडिया ने इसे शरीफ़ की अनदेखी की तरह लिया। मोदी सरकार पाकिस्तान को संदेश देना चाहती थी कि सीमा पार से चरमपंथ पर लगाम लगाए बिना दोनों देशों के बीच बातचीत मुमकिन नहीं। इसलिए दोनों में कोई दुआ सलाम नहीं हुई पर बाद में कूटनीतिक परंपरा के तहत ये तस्वीरें सामने आईं।