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'लोगों को सरकार से सवाल करने का अधिकार होना चाहिए'

Fri, 16 Oct 2015 07:29 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कहा है कि लोगों के पास सरकार से सवाल पूछने का अधिकार होना ही चाहिए। उन्होंने इसे लोकतंत्र में विश्वास बढ़ाने के लिए जरूरी बताया। समय से मिली जानकारी एक गलत निर्णय को रोक सकती है।  इसके साथ ही आरटीआई आवेदनों का जवाब देते हुए तीन ‘टी’- टाइमलीनेस (समयबद्धता), ट्रांसपेरेंसी (पारदर्शिता) और ट्रबल-फ्री अप्रोच (सरल पद्धति) की जरूरत पर भी बल दिया।
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'लोगों को सरकार से सवाल करने का अधिकार होना चाहिए'

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केंद्रीय सूचना आयोग की 10वीं वर्षगांठ के अवसर पर शुक्रवार को पीएम ने सरकारी विभागों से कहा कि शासन में और ज्यादा खुलापन होने से नागरिकों को मदद मिलेगी क्योंकि आज के दौर में गोपनीयता की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि आरटीआई ने आम आदमी को सत्ता में बैठे लोगों से सवाल पूछने का अधिकार दिया है। हम जितनी तेजी से पारदर्शिता की तरफ बढ़ेंगे, लोगों का लोकतंत्र पर विश्वास उतना ही मजबूत होगा।
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'लोगों को सरकार से सवाल करने का अधिकार होना चाहिए'

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उन्होंने सूचना के अधिकार के जरिए प्रशासन में सुधार लाने पर बल दिया। कहा कि यदि किसी नागरिक ने कोई प्रश्न पूछा है तो इसका मतलब है कि सरकार में जरूर कोई समस्या है, जो सवाल उठाने की जरूरत पड़ी। आरटीआई के जरिए पूछा गया एक छोटा सवाल आपको नीति बदलने के लिए मजबूर कर सकता है।

'लोगों को सरकार से सवाल करने का अधिकार होना चाहिए'

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मोदी ने कहा, जब चीजें ऑनलाइन हो जाती हैं, तो सभी मुद्दे पारदर्शी हो जाते हैं और आरटीआई का मुख्य उद्देश्य शासन में पारदर्शिता लाना है। अधिकतम चीजें ऑनलाइन... अधिकतम पारदर्शिता। उन्होंने कहा, अगर हम आरटीआई को केवल सवालों के जवाब देने तक सीमित कर देते हैं तो शासन व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं होंगे। हमें सवालों का विश्लेषण करना चाहिए।
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बता दें कि अरुणा रॉय समेत प्रमुख आरटीआई कार्यकर्ताओं ने इस समारोह का बहिष्कार किया क्योंकि अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कुछ ही कार्यकर्ताओं को इसमें आमंत्रित किया था। मोदी ने कहा कि सूचना का अधिकार सिर्फ जानने के अधिकार के बारे में नहीं है, यह सवाल पूछने के अधिकार के बारे में भी है क्योंकि इससे लोकतंत्र में विश्वास बढ़ेगा। अपने महत्वाकांक्षी डिजिटल इंडिया का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि यह स्कीम आरटीआई की भावना के समपूरक है। जितनी अधिक चीजें ऑनलाइन होंगी, उतनी अधिक पारदर्शिता आएगी। इससे पहले अरुण जेटली ने आरटीआई एक्ट को सफल और समाज में बदलाव लाने वाला बताया।
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