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जलते घरों में घुसकर हिंदुओं ने बचाई मुस्लिमों की जान

Fri, 19 Sep 2014 03:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
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डौला और बसौद के लोगों ने आपदा की घड़ी में भाईचारे की मिसाल पेश की। राजनीति में भले ही धर्म और जाति आड़े आती हो लेकिन मदद करने में नहीं आई। हिंदुओं ने मुस्लिमों को जलते घरों से बाहर निकाला। उन्हें अपनी गाड़ियों में बिठाकर आग की लपटों से दूर सुरक्षित जगह पहुंचाया। वहीं मुस्लिमों ने हिंदुओं की मदद को हाथ बढ़ाते हुए उन्हें मदरसों में पनाह दी। उन्हें खाना खिलाया। पूरा ख्याल रखा।
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मेरठ-बागपत रोड पर डौला गांव के सामने बुधवार की रात में 11.30 बजे इंडेन का 18 टन एलपीजी का विशालकाय टैंकर पलटने से लगी भीषण आग दमकल की 11 गाड़ियों की मदद से बृहस्पतिवार को शाम 4.30 बजे बुझ पाई।
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इस बीच आग में धूं-धूंकर जले गांव के 30 घरों में कम से कम 10 लोग झुलस गए। इनके अलावा 40 मवेशी झुलसे हैं।

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उधर आग से बचने के लिए मची भगदड़ में गिरकर 20 महिलाओं समेत 50 लोग घायल हो गए हैं।
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पुलिस ने टैंकर (संख्या जेके024-एक्स3423) के ड्राइवर नेपाल के लुंबिनी निवासी नारायण दास को हिरासत में ले लिया है। वह हरियाणा के करनाल से टैंकर लेकर नेपाल जा रहा था। वह टैंकर पलटने से पहले ही कूद गया था।
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ड्राइवर ने पुलिस को बताया डौला चौकी पार करते ही सामने से आ रही एक गाड़ी को बचाने के चक्कर में टैंकर पलटा। इसके बाद उसके इंजन में आग लगी। इस बीच टैंकर में आई दरार से निकली गैस में धमाके के साथ आग लगी जो तेजी से चारों ओर फैल गई।
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गांव के कुछ लोग घर छोड़कर आसपास के गांवों में शरण लिए हैं। एसपी जितेंद्र शाही ने बताया इस मामले में पुलिस अपनी ओर से केस दर्ज करेगी। एडीएम संतोष कुमार शर्मा ने कहा तहसीलदार की रिपोर्ट आते ही घायलों को मुआवजा दिया जाएगा। जिनके घर जले हैं, उन्हें भी जल्द ही मुआवजे के चेक दिए जाएंगे।

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डौला अग्निकांड ने आपदा प्रबंधन व्यवस्था की पोल खोल दी। पुलिस से लेकर प्रशासन ऐसे किसी हादसे को तैयार नहीं था। इतनी तक जानकारी नहीं थी कि एलपीजी की आग को कैसे बुझाया जाना चाहिए। आधी रात के बाद पुलिस के अफसर इंडेन के अधिकारियों से पूछ रहे थे कि आग जलती रहने में ज्यादा खतरा है या फिर बुझने के बाद गैस रिसाव होने पर।

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रातभर गैस फैलती रही जबकि मास्क पहुंचे सुबह को। रात में उपचार तो दूर पुलिस प्रशासन यह तक मालूम नहीं कर पाया कि आग से कितने लोग झुलसे हैं और भगदड़ में कितने लोगों को चोट आई है।

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रात से लेकर दूसरे दिन शाम तक लोग सड़कों पर, खेतों में बागों में भूखे प्यासे तड़पते रहे। प्रशासन ने घरों को खाली तो करा लिया, लेकिन न तो उनके ठहरने का इंतजाम कराया और न ही उनके खाने की व्यवस्था की।

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बुधवार की रात में लगी आग के बाद ग्राम डौला के घरों को प्रशासन ने मुनादी कराकर खाली करा दिया। आग की भयावहता की दहशत से लोग अपने घरों को छोड़कर गांव से तो दौड़ पड़े, लेकिन कोई ठिकाना नहीं मिला।
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गनीमत यह रही कि बुधवार की रात काफी उमस भरी थी। हवा धीमी थी। इसलिए आग पूरे गांव में नहीं फैली। इस कारण लोगों को भागने का मौका मिल गया। यदि हवा तेज होती तो तबाही का मंजर और भी भयावह होता।
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