अफगानिस्तान तालिबानियों से निपटने के लिए भारत से सैन्य हेलीकॉप्टर खरीदने की तैयारी कर रहा है। जानिए रूस में निर्मित एमआई-25 की खासियत।
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तालिबान की अब खैर नहीं, भारत के एमआई-25 का बरपेगा कहर
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एमआई-25 एक बड़ा एंटी आर्मर हेलीकॉप्टर है। ये दो और कैटेगरी एमआई-24 और एमआई-35 में उपलब्ध है। इसमें आठ सैनिक सवार हो सकते हैं। इसे किसी भी मौसम में इस्तेमाल किया जा सकता है।
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हेलीकॉप्टर के विंगटिप्स पर 6 सस्पेंशन वैपन यूनिट लगे हैं। जो जमीन पर अपने लक्ष्य को भेदकर तहस-नहस कर देते हैं।
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दो इंजन वाले इस लड़ाकू हेलीकॉप्टर में नीचे की तरफ 12 एंटी अटैक मिसाइलों को फिट किया जा सकता है।
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इस हेलीकॉप्टर में 12.7 एमएम की याकबी फोर बैरल्ड मशीन गन है जो एक मिनट में चार से पांच हजार गोलियां तक दाग सकती है।
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इसमें एकबार में 1500 किलोग्राम ईंधन भरा जा सकता है। इसके साथ ही इसमें 1200 किलोग्राम ईंधन अलग से ले जाने के लिए टैंक है। जिसे ये ऑटेमैटिक रीफिल कर लेता है।
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ये दुनिया का तीसरा सबसे तेज उड़ान भरने वाला मल्टीरोल हेलीकॉप्टर है। ये अधिकतम 310 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार के उड़ान भर सकता है।
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अमेरिका इसके मुकाबले अफगानिस्तान को मैकडोनाल्ड्स डगलस एमडी 530 हेलीकॉप्टर देने को तैयार है लेकिन अफगानिस्तान को एमआई-25 ही पसंद आ रहे हैं।
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इसका निर्माण रूसी कंपनी मिल मॉस्को हेलीकॉप्टर प्लांट में होता है। पहली बार इस हेलीकॉप्टर ने साल 1969 में उड़ान भरी थी। लेकिन इसे दुनिया के सामने साल 1972 में लाया गया। कंपनी अब तक ढाई हजार से ज्यादा ऐसे हेलीकॉप्टर बना चुकी है।
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नाटो ने इस हेलीकॉप्टर को हिंड ए और हिंड डी नाम दिए हैं। ये हेलीकॉप्टर एंटी टैंक मिसाइल सिस्टम से लैस हैं।
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अफगानिस्तान अल्जीरिया, अंगोला, बुल्गारिया, क्युबा, चैक गणराज्य, जर्मनी, हंगरी, भारत, इंडोनेशिया, ईराक, आइवोरी कॉस्ट, लीबिया, मोजांबिक, नॉर्थ कोरिया, पेरू, पोलैंड, वियतनाम, दक्षिण यमन आदि देशों के वायुसेना के बेड़े में ये हेलीकॉप्टर शामिल हैं।