सूबे के कैबिनेट मंत्री आजम खां ने ताजमहल को वक्फ बोर्ड की संपत्ति मानने की मांग से विवाद तो खड़ा कर दिया लेकिन वक्फ बोर्ड के कारनामों पर नजर नहीं डाली। वक्फ बोर्ड ने इन संपत्तियों से कमाई तो की लेकिन रखरखाव का जिम्मा एएसआई के कंधों पर डाल दिया। जामा मस्जिद (आगरा) में तो अवैध रूप से 85 दुकानें बनाकर किराए पर भी दे दीं।
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कमाई के लालच में खोखली कर दी जामा मस्जिद
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वक्फ बोर्ड के आंकड़ों पर नजर डाले तो ताजनगरी में 1602 सुन्नी प्रापर्टी है और 80 शिया वक्फ संपत्तियां हैं। इसके अलावा सात सौ प्रापर्टी पंजीकृत नहीं है।
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महज 30 साल पहले जामा मस्जिद के नीचे पक्की दुकानें नहीं थीं। इस दौरान वक्फ बोर्ड ने अवैध रूप से जामा मस्जिद के बरामदों में दुकानें तामीर करा दीं।
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वहीं, वक्फ बोर्ड के किराए के लालच से जामा मस्जिद की नींव पूरी तरह से खोखली हो चुकी है।
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दिल्ली में हाईकोर्ट के फैसले पर जामा मस्जिद से व्यवसायिक गतिविधियां और दुकानें हटा दी गईं लेकिन ताज नगरी में न केवल यह जारी है बल्कि जामा मस्जिद के अस्तित्व के लिए ही खतरनाक साबित हो रही हैं।
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वक्फ बोर्ड ने इन संपत्तियों से कमाई तो की लेकिन रखरखाव का जिम्मा एएसआई
के कंधों पर डाल दिया। जामा मस्जिद में तो अवैध रूप से 85 दुकानें बनाकर
किराए पर भी दे दीं। कागजों पर हर महीने 17 हजार रुपये इसका किराया है जबकि असल रकम कहीं ज्यादा है।
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कुछ दुकानदारों ने मस्जिद की दीवार को ही खोखला कर दुकानों का दायरा बढ़ा लिया। अब मस्जिद की बुनियाद बेहद कमजोर हो चुकी है।
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कुछ दुकानदारों ने मस्जिद की दीवार को ही खोखला कर दुकानों का दायरा बढ़ा लिया। अब मस्जिद की बुनियाद बेहद कमजोर हो चुकी है।
जामा मस्जिद में दुकानें मेरे कार्यकाल से पहले की हैं। हम तो किराया वसूलते हैं। मालिकाना हक दुकानों पर वक्फ बोर्ड का है, एएसआई केवल मेंटेनेंस का काम करता है। (असलम कुरैशी चेयरमैन, इस्लामिया लोकल एजेंसी)