गुजरात में ओबीसी कोटे के तहत पटेल समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर बढ़ रही हिंसा पर काबू पाने के लिए अब सेना को कमान सौंपी गई है।
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हिंसा से तड़प उठा गुजरात, सड़कों पर उतरी सेना
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सेना ने हिंसा से सबसे ज्यादा प्रभावित अहमदाबाद में फ्लैग मार्च किया और स्थिति पर काबू पाने का प्रयास किया। आंदोलन के हिंसक हो जाने से अभी तक 9 लोगों की जान चली गई है।
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जिलाधिकारी राजकुमार बेनीवाल ने बताया कि शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सेना की पांच कंपनियां बुलाई ली गई हैं।
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स्थिति पर काबू पाने के लिए अर्द्धसैनिक बलों और आरएएफ के 5000 से अधिक जवानों की तैनाती भी की गई है। बंद के कारण पूरे राज्य में जनजीवन ठप हो गया।
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हिंसा से प्रभावित सूरत सहित मेहसाणा, राजकोट, जामनगर, पालनपुर, उंझा और पाटन में कर्फ्यू लगा दिया गया है। हिंसा में 9 लोगों की मौत के अलावा एक एसपी सहित कई लोग घायल हुए है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शांति बनाए रखने की अपील के बावजूद बुधवार को राज्य में जगह-जगह आगजनी, पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं जारी रहीं।
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पुलिस ने बताया कि मारे गए लोगों में से 6 की मौत पुलिस और सीआरपीएफ की फायरिंग में जबकि दो अन्य लोग झड़पों में मारे गए।
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बनासकांठा के पालनपुर कस्बे के पास दोपहर करीब एक बजे भीड़ ने गध पुलिस स्टेशन को जलाने की कोशिश की। भीड़ पर काबू पाने के लिए पुलिस ने फायरिंग की, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई।
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सूरत के विभिन्न इलाकों में पटेल समुदाय द्वारा बंद करवाए जाने के दौरान आगजनी और पथराव हुआ। करीब एक हजार लोगों की भीड़ ने शहर के उधना इलाके में सूरत नगर निगम के दो गोदामों को जला दिया।