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फिल्मी पर्दे से कितना अलग है असली 'रामगढ़', खुद देख लें

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शोले के गांव रामगढ़ का जिक्र आते ही जेहन में कई दृश्य घूमने लगते हैं। ठाकुर की हवेली में लालटेन बुझाती छोटी बहू, नीचे बैठ हारमोनियम बजाता जय, पानी की टंकी पर चढ़ा वीरू, बक-बक करती बसंती और न जाने क्या-क्या...। लेकिन ये सब फिल्मी है, असली रामगढ़ को जानेंगे तो दांतों तले उंगलियां दबा लेंगे। (रिपोर्ट व तस्वीरेंः जनार्दन पांडेय, रामगढ़ से लौटकर)
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फिल्मी पर्दे से कितना अलग है असली 'रामगढ़', खुद देख लें

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मैसूर के महाराजा के अधिकार क्षेत्र में आने वाला ये तालुका (छोटा कस्बानुमा इलाका) तब भी बेहद समृद्ध था, जो कि फिल्मी पर्दे पर दिखाए गए गांव से बिल्कुल मेल नहीं खाता। तब और अब भी इसका नाम है रामनगरम, न कि रामगढ़। कई दफे खबरें आईं कि शोले के हिट होने के बाद इसका नाम बदलकर रामगढ़ कर दिया गया है। लेकिन ऐसा नहीं है। पूरे कर्नाटक में रामगढ़ जैसी कोई जगह नहीं है।
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ताज्जुब की बात है कि जिस जगह पर हिन्दी फिल्म शोले के रामगढ़ की कल्पना की गई, वहां बोलना तो दूर गिने-चुने लोग हिन्दी समझ पाते हैं। वहां गब्बर सिंह जैसे खूंखार डाकू की कल्पना की गई, जहां आजतक कोई डाकू आया ही नहीं।

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शोले के रामगढ़ में लोग खौफ के चलते डाकू को अनाज देते थे। जबकि असली रामगढ़ में तब भी बेहतर पुलिस व्यवस्‍था थी। यहां तक एक दफे जब खुद ही सिप्पी एक परेशानी में फंसे...
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तो असली रामगढ़ के पुलिस स्टेशन सहायता के लिए पहुंचे थे। फिल्मी रामगढ़ में दिखाया गया कि गांव में बिजली नहीं है। ठाकुर की छोटी बहू हर शाम हवेली की लालटेन धीमी करती दिखती। लेकिन असली रामगढ़ में तब अच्छी खासी बिजली आती थी। फिल्म एक पानी की टंकी दिखाई गई। जबकि फिल्म में मजदूरी करने वाले मोहम्मद गौस बताते हैं कि यहां तब भी दो टंकियां थी।
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फिल्म में दिखाया गया कि गांव के बच्चों को रोजगार के लिए शहर जाना पड़ेगा। जबकि असली रामगढ़ में तब भी जाना-माना सिल्क बाजार था। जिसमें दूसरे गांवों के लोग रोजगार तलाशने आते थे। फिल्मी रामगढ़ में बसंती ताव देकर कहते सुनी गई कि रामगढ़ जाने के लिए तांगा के अलावा कुछ नहीं मिलेगा। जबकि असली रामगढ़ में तब भी आने-जाने के अच्छे साधन थे।
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जिस रामनगरम में रामगढ़ की कोरी कल्पना करके शोले शूट की गई। वहां ये शूटिंग होने के पहले ही सिनेमाघर था। शोले ने भी वहां  लगातार 100 दिन तक चलकर रिकॉर्ड बनाया था। शायद इसीलिए ये कोरी कल्पना फिल्म की शूटिंग के साथ समाप्त हो गई। अब वहां रामगढ़ जैसा कुछ भी नहीं।

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ब‌ल्कि दो लाख से ज्यादा आबादी वाला जिला हो चुके इस असली रामगढ़ में अब...

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राष्ट्रीय स्तर का इंजीनियरिंग कॉलेज है, कमिश्नर दफ्तर, दो पुलिस स्टेशन, दो तीन सितारा होटल, छह सिनेमाघर, नेशनल वल्चर सेंचुरी, ‌सिल्क बाजार हैं। गौरतलब है कि यह पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के संसदीय क्षेत्र और कर्नाटक के पूर्व मूख्यमंत्री एचडी कुमार स्वामी के विधानसभा क्षेत्र में आता है।
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