10 जुलाई सोमवार से शुरू हो रहा सावन का महीना भगवान शिव को मनाने का समय है, लेकिन कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत है वरना नाराज हो जाएंगे।
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सावन के महीने में मांस-मदिरा आदि के सेवन नहीं करना चाहिए। शादी जैसा शुभ कार्य नहीं करने चाहिए। इसके अलावा ब्रह्मचर्य व्रत के नियमों का पालन करना चाहिए। सावन के महीने में एक व्रती को हरी सब्जियां और साग नहीं खाना चाहिए। शरीर पर तेल नहीं लगाना चाहिए और न ही कांसे के बर्तन में खाना-खाना चाहिए। पूजा के समय में शिवलिंग पर हल्दी न चढ़ाएं। शिवलिंग पर न चढ़ाएं हल्दी।
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सावन के महीने में दूध का सेवन अच्छा नही होता है। यही कारण है कि सावन में भगवान शिव का दूध से अभिषेक करने की बात कही गई है। इससे वात संबंधी दोष से बचाव होता है। सावन के महीने में दिन के समय नहीं सोना चाहिए। सावन के महीने में बैंगन नहीं खाना चाहिए। बैंगन को अशुद्ध माना गया है इसलिए द्वादशी, चतुर्दशी के दिन और कार्तिक मास में भी इसे खाने की मनाही है।
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इस महीने में अगर घर के दरवाजे पर सांड आ आए तो उसे मार कर भगाने की बजाय कुछ खाने को दें। सांड को मारना शिव की सावारी नंदी का अपमान माना जाता है। सावन के महीने में शिव भक्तों का अपमान न करें। भगवान शिव के भक्तों का सम्मान शिव की सेवा के समान फलदायी होता है। यही कारण है कि कई लोग कांवड़ियों की सेवा करते हैं।
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सावन के महीने में क्रोध में किसी को अपशब्द नहीं कहें और बड़े बुजुर्गों सम्मान करें। जीवनसाथी के साथ वाद-विवाद और अपश्ब्दों का प्रयोग हानिकारक होता है। इन दिनों शिव पार्वती की पूजा से दांपत्य जीवन में प्रेम और तालमेल बढ़ता है, इसलिए किसी बात से मन मुटाव की आशंका होने पर शिव पार्वती की पूजा करनी चाहिए।
सावन के महीने में प्रति दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करना चाहिए। इससे कई जन्मों के पाप का प्रभाव कम हो जाता है। शास्त्रों में बताया गया है सावन में सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान ध्यान करके भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए। देर तक सोने से यह अवसर हाथ से चला जाता है और शिव की कृपा से वंचित रह जाते हैं।