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Acharya Vidyasagar: किसी ने रात का भोजन छोड़ा, कोई युवावस्था में गौसेवा से जुड़ा, कैसे बदला लोगों का जीवन

Sun, 18 Feb 2024 08:02 PM IST
अर्जुन रिछारिया न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

Acharya Vidyasagar Ji Maharaj: आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की सलाह को भक्त आदेश मानकर अपनाते थे। सैकड़ों लोगों के जीवन में सुधार आया और अब वे दूसरों को भी उसी मार्ग पर चलने के लिए आग्रह कर रहे हैं।
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आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से आशीर्वाद लेते हंसमुख गांधी। - फोटो : न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने Acharya Vidyasagar आज देह त्याग की। आचार्य श्री दो बार इंदौर आए। चातुर्मास के लिए पिछली बार जब वे आए तो दस महीने तक रुके। 20 साल बाद 4 साल पहले वे इंदौर आए थे और इस दौरान भक्तों को उनका लंबे समय तक स्नेह और आशीष मिला। भक्तों ने बताया कि उनके सानिध्य से लाखों लोगों के जीवन बदले। किसी ने रात का भोजन छोड़ा तो किसी ने नमक और शक्कर का त्याग किया। किसी ने चमड़े के बेल्ट और जूते छोड़े तो किसी ने जंक फूड खाना छोड़ दिया। आचार्य श्री के इन उपायों से लाखों लोगों का जीवन बेहतर बना और बेहतर स्वास्थ्य पाने के साथ वे सब सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से भी बेहतर बन पाए।  

उनके कहने पर मैंने रात का भोजन त्याग दिया और बेहतर स्वास्थ्य पाया
दिबंगर जैन सर्वजातिय महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री हंसमुख गांधी ने बताया कि मैं इंदौर में उनके साथ रुके भक्तों के लिए भोजन लेकर जाता था। इस दौरान उन्होंने मुझे ही रात्रि भोजन त्यागने का कहा। उनके सुझाव को मैंने आदेश की तरह लिया और तबसे रात का भोजन त्याग दिया। इससे मुझे बेहतर स्वास्थ्य मिला और मेरे जीवन में कई बदलाव आए। गांधी ने बताया कि लाखों लोगों का जीवन इस तरह से बदला। किसी ने नमक, शक्कर का त्याग किया तो किसी ने जंक फूड छोड़ दिया। लाखों लोगों ने लहसुन, प्याज और आलू खाना छोड़ दिया। गांधी ने बताया कि इंदौर में रेवती रेंज स्थित प्रतिभा स्थली की उन्होंने शुरुआत की। वहां पर पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों ने विद्यासागर जी से ही दीक्षा ली है। मप्र में पांच जगह इस तरह की प्रतिभा स्थली हैं। यहां बेहतर शिक्षा के साथ जैनिज्म सिखाया जाता है। अभी यहां पर दो हजार से अधिक बच्चियां हैं और होस्टल सुविधा भी है। 

उनके कहने पर 13 जिनालयों का प्राण प्रतिष्ठा एक मंच पर हुआ
गांधी बताते हैं कि उनके कहने पर इंदौर में 13 जिनालयों का पंच कल्याणक एक साथ हुआ था। उन्होंने सामूहिक रूप से यह कार्यक्रम करवाया। इससे बहुत पैसा बचा और एक साथ सभी समाजजन आए। 

आंख उठाकर नहीं देखते थे
गांधी ने बताया कि वे बहुत कम लोगों को आंख उठाकर देखते थे। उनसे आंख मिल गई तो भक्त धन्य हो जाते थे। उन्होंने जैनिज्म का सौ प्रतिशत पालन किया। उनके साथ रहकर हमने बहुत कुछ सीखा। वे एक ही समय भोजन करते थे, उसी समय जल लेते थे फिर दूसरे दिन ही अन्न जल लेते थे। दस से बीस किमी रोज चलते थे। उन्होंने कई तीर्थों का निर्माण किया और 350 साधु साध्वियां समाज को समर्पित किए। 
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चातुर्मास के दौरान आचार्य भगवन प्रज्ञासागर जी महाराज सेआशीर्वाद लेते गौरव। - फोटो : न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
युवावस्था में ही धार्मिक कार्यों से जोड़ा
प्रज्ञा युवा मंच इंदौर के अध्यक्ष गौरव पाटौदी बताते हैं कि उनके सानिध्य से ही मैं युवावस्था में धर्म की ओर मुड़ा। उनके साथ रहकर मैंने सीखा कि नंगे पांव जीवनभर रहना कितनी कठिन तपस्या है। उनके आशीर्वाद से ही हम 1251 लोगों को शिखरजी की यात्रा पर ले गए। कई युवाओं के साथ मैंने गौसेवा का प्रोजेक्ट शुरू किया। उन्होंने मेरे जैसे लाखों युवाओं को अहिंसा और धर्म के मार्ग पर चलना सिखाया। हम भाग्यशाली हैं कि हमने उनके युग में जन्म लिया। हमें उनके रूप में भगवान का दर्शन करने का मौका मिला। 
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श्री विद्यासागर जी महाराज से आशीर्वाद लेते अरविंद बागड़ी और संगीता बागड़ी। - फोटो : न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
सामाजिक कार्यों के लिए प्रेरित किया
सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद बागड़ी और संगीता बागड़ी ने बताया कि आचार्य के मार्गदर्शन से कई सेवा कार्य किए। उन्होंने लाखों लोगों को सामाजिक कार्यों से जोड़ा। उनसे मिलना ही सौभाग्य की बात था। उनकी दिनचर्या हमें बहुत कुछ सिखाती थी और इससे हमारा जीवन भी सकारात्मक तरीक से बदलता जाता था। 
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