मंगोलिया की एक खोई हुई जनजाति को ढूंढ़ निकाला फोटोग्राफर हामिद सरदार अफखामी ने। तस्वीरें ऐसी हैं आप देखते रह जाएंगे।
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जब एक फोटोग्राफर ने कैमरे में कैद की एक खोई हुई जनजाति की हैरतअंगेज तस्वीरें
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मंगोलिया की दुखा जनजाति के लोगों की लाइफस्टाइल देख आप यकीन नहीं करेंगे। इनकी लाइफस्टाइल हॉलीवुड की किसी फिक्शन मूवी जैसी लगती है।
सोर्स-बोरडमथेरेपी.कॉम
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दुखा जनजाति के इन दिनों महज 44 परिवार बचे हैं। जिनमें करीब 400 लोग रहते हैं।
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दुखा लोग रेनडियर यानी बारहसिंगों को पालतू जानवर बनाकर अपने काम में लाते हैं। दुखा लोगों को 'सातन' भी कहा जाता है। इसका मतलब होता है, बारहसिंगों की देखभाल करने वाला।
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बच्चों को सिखाया जाता है कि बारहसिंगों को कैसे अपने इस्तेमाल में लाएं। एकबार बारहसिंहा इन लोगों के साथ रहने का आदि हो जाता है तो छोटे बच्चे भी इनसे खेलने लगते हैं।
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यह छोटी सी बच्ची बारहसिंगा को नहलाने के लिए प्रशिक्षित की गई है।
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दुखा जनजाति के लोग पर्यटन उद्योग से भी पैसा कमा लेते हैं। लोग अक्सर उनके प्रदर्शन, शिल्प और बारहसिंगा की सवारी के लिए अच्छे पैसे का भुगतान करते हैं।
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दुखा जनजाति के लोग गोल्डन ईगल्स को भी प्रशिक्षित करते हैं ताकि शिकार करते वक्त उनसे मदद मिल सके।