'दंगल' की रियल धाकड़बहनों ने एक बड़ी ख्वाहिश जाहिर की है, जिसे बॉलीवुड स्टार आमिर खान जरूर पूरी करना चाहेंगे। आप भी जान लीजिए, क्या चाहती हैं वो।
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पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में फौगाट बहनें
दरअसल, गीता फौगाट और बबीता फौगाट मूवी में अभिनय करना चाहती हैं। उनका कहना है कि अगली बार जब दंगल-2 आएगी तो वे जरूर एक्टिंग करेंगी। गीता फौगाट ने बताया कि जब दंगल बन रही थी, तब डायरेक्टर ने उनसे पूछा था कि फिल्म में अपना किरदार तुम खुद भी निभा सकते हो, लेकिन बिजी शेड्यूल के चलते उन्होंने मना कर दिया। अब अगर मौका मिलता है वे ये अनुभव भी करना चाहेंगी।
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पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में फौगाट बहनें
फौगाट बहनें एक कार्यक्रम के सिलसिले में पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ स्थित लॉ ऑडिटोरियम आई थीं। यहां धाकड़ बहनों की एक झलक पाने के लिए लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। गीता फौगाट ने बताया कि वे एक एकेडमी खोलना चाहती हैं, जिसमें वे खुद बच्चियों को कुश्ती की ट्रेनिंग दे सकें। इसके लिए उन्होंने आमिर खान को लेटर लिखकर हरियाणा में एक ऐसी अकेडमी खोलने की मांग की है।
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गीता फोगाट
- फोटो : अमर उजाला
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने खुद अपनी जिंदगी से जुड़े कई किस्से शेयर किए। बबीता ने बताया कि मूवी में बचपन की फौगाट बहनें जो शरारतें करती हैं, वे सब उन्होंने रियल लाइफ में भी की है। बबीता ने बताया कि एक बार वे दोनों बहनें अपनी कार से स्टेडियम में प्रैक्टिस के लिए जा रही थी। स्टेडियम पहुंची तो एक अफसर की गाड़ी के साथ उनकी गाड़ी टकरा गई। अफसर के ड्राइवर ने बाहर निकलकर पैसे मांगे और न देने पर उसने बदतमीजी शुरू कर दी।
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कॉमनवेल्थ गेम्स की गोल्ड मेडलिस्ट
- फोटो : अमर उजाला
बबीता ने बताया कि उस आदमी ने उनकी कार की चाबी भी निकालने की कोशिश की और उसका कॉलर पकड़ लिया। बस फिर क्या था गुस्से में आकर बबीता ने उस आदमी के तीन थप्पड़ जड़ दिए। गीता ने बताया कि पिता के पास एक टॉर्च होती थी जिससे वे अंधेरे में भी दोनों बहनों पर नजर रखते थे कि कहीं दोनों रनिंग करते वक्त रुक तो नहीं गई। इसके अलावा भी बहुत सी ऐसी शरारतें हैं, जिन्हें पापा अकसर याद करते हैं।
गीता ने बताया कि कई बार वे टॉर्च के सेल गुम कर देते थे और घड़ी का अलार्म तो कई बार उन्होंने बदला था। जब कई बार पापा बाहर कहीं जाते थे तो वे टीवी देखने लग जाते थे और पापा पर नजर रखने के लिए छोटी बहनों को खिड़की पर बिठा देते थे। गीता बताती हैं कि उनके पिता का कोच के साथ टकराव रहता था। कई बार कोच उनके पिता को स्टेडियम के अंदर भी नहीं आने देते थे। शायद वे सोचते थे कि कहीं उनकी सफलता का पूरा श्रेय पिता को चला जाए।