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MP: भीषण गर्मी, सिर पर गठरी, भक्तों को भगवान नागचंद्रेश्वर ने दिया बल, 118KM लंबी पंचक्रोशी यात्रा की तस्वीरें

Thu, 24 Apr 2025 08:11 AM IST
उदित दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

 


 

 
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पंचक्रोशी यात्रा 2025 - फोटो : अमर उजाला
धार्मिक नगरी उज्जैन में वैसे तो हर तीज-त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। लेकिन, वैशाख मास कृष्ण पक्ष की दशमी पर श्रद्धालु भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन 118 किलोमीटर लंबी एक यात्रा की शुरुआत करते हैं। पांच दिनों तक सतत  जारी रहने वाली इस यात्रा को पंचक्रोशी यात्रा कहा जाता है। यात्रा के दौरान श्रद्धालु प्रतिदिन एक शिव मंदिर पर पहुंचते हैं और पूजा-अर्चना और आराधना करते हैं। इसके बाद दूसरे पड़ाव की ओर चल देते हैं। पांच दिनों तक चलने वाली इस यात्रा का समापन मां शिप्रा में स्नान के बाद होता है।


बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में वैशाख महीने की प्रचंड गर्मी में बीते बुधवार से पंचक्रोशी यात्रा की शुरुआत हो गई है। इस यात्रा में भीषण गर्मी की परवाह किए बिना, हजारों भक्त नंगे पैर, सिर पर जरूरी सामान की गठरी या बैग लिए चल रहे हैं। पंचक्रोशी यात्रा का शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है। जिस प्रकार माघ और कार्तिक मास का धार्मिक महत्व है, उसी प्रकार वैशाख मास में किए गए दान, पुण्य और स्नान का भी विशेष महत्व है। पुराणों में वैशाख मास में स्नान के महत्व का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु इस पवित्र महीने में दान-पुण्य या स्नान नहीं कर पाते हैं, वे इस पंचक्रोशी यात्रा में शामिल होकर या यात्रा के पांच दिनों में स्नान करके पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं। यही कारण है कि दूर-दूर से श्रद्धालु इस आध्यात्मिक यात्रा में भाग लेने के लिए उज्जैन पहुंचे हैं।

बताया जाता है कि पंचक्रोशी यात्रा का केंद्र बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन चतुर्भुज आकार में बसी हुई है। शहर के चारों ओर स्थित शिव मंदिर इसके द्वारपाल माने जाते हैं— पूर्व में पिंगलेश्वर, दक्षिण में कायावरोहणेश्वर, पश्चिम में बिल्वकेश्वर, उत्तर दिशा में दुर्देश्वर और नीलकंठेश्वर महादेव। इन पांच प्रमुख मंदिरों की दूरी लगभग 118 किलोमीटर है। पंचक्रोशी यात्रा के दौरान श्रद्धालु इन्हीं पांचों शिव मंदिरों की परिक्रमा करते हैं और पवित्र क्षिप्रा नदी में स्नान करते हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इस यात्रा को पूर्ण करने वाले भक्तों को 33 कोटि देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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पंचक्रोशी यात्रा 2025 - फोटो : अमर उजाला
यहां से शुरू हुई पंचक्रोशी यात्रा
बुधवार 23 अप्रैल की सुबह श्रद्धालुओं ने नागचंद्रेश्वर मंदिर पटनी बाजार से भगवान का पूजन-अर्चन कर और बल प्राप्त कर यात्रा की शुरुआत की। यह यात्रा लखेरवाड़ी से होते हुए छत्री चौक, सराफा, कंठाल चौराहा, निजातपुरा, कोयला फाटक चौराहा, उद्योगपुरी, ढांचा भवन, होटल नक्षत्र के सामने, उंडासा, पिंगलेश्वर, श्री सिंथेटिक चौराहा, धतरावदा, लालपुर, सेफी नाका चौराहा, शक्करवासा, शनि मंदिर, महावीर तपोभूमि चौराहा, राघौपिपलिया, करोहन, गोंदिया, तालोद, बंबोरा, नलवा चौपाटी, अंबोदिया, नईखेड़ी, आजमपुरा, सोढंग नाका चौराहा, केडी पैलेस, जैथल, आगर रोड पुराना टोल टैक्स, उंडासा होते हुए पुनः होटल नक्षत्र के सामने से ढांचा भवन, उद्योगपुरी, कोयला फाटक चौराहा, निजातपुरा, कंठाल चौराहा, सराफा, छत्री चौक, नागचंद्रेश्वर मंदिर पर बल वापस कर रामघाट पर स्नान पश्चात यात्रा समाप्त होगी। यह यात्रा पूरे पांच दिनों तक चलेगी।
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पंचक्रोशी यात्रा 2025 - फोटो : अमर उजाला
सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन का एक प्रमुख पर्व है पंचक्रोशी यात्रा
वैशाख माह में निकलने वाली पंचक्रोशी यात्रा उज्जैन के सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन का एक प्रमुख पर्व है। यह यात्रा न केवल एक भक्ति यात्रा है, बल्कि आत्मा की शुद्धि, पापों के नाश और मोक्ष की प्राप्ति का साधन भी मानी जाती है। प्रतिवर्ष पंचकोशी यात्रा का आयोजन उज्जैन नगर के बाहर स्थित पांच प्रमुख पवित्र स्थलों के दर्शन के लिए किया जाता है, जिनकी परिक्रमा करके श्रद्धालु अपने जीवन को आध्यात्मिक दृष्टि से शुद्ध करते हैं। पंचक्रोशी का शाब्दिक अर्थ है –पांच कोस, अर्थात यह यात्रा लगभग 118 किलोमीटर की होती है। यह यात्रा पांच दिन होती है और हर दिन एक पवित्र स्थल के दर्शन कर श्रद्धालु वहां रात्रि विश्राम करते हैं, ध्यान करते हैं और साधना में लीन होते हैं। इस यात्रा के माध्यम से श्रद्धालु अपने जीवन के सभी नकारात्मक पहलुओं को छोड़कर शुद्धता और पुण्य की ओर अग्रसर होते हैं। पंचक्रोशी यात्रा में पांच प्रमुख पड़ाव आते हैं, जहां श्रद्धालु रात्रि विश्राम करते हैं और विशिष्ट पूजा-अनुष्ठान करते हैं। हर एक स्थल का एक विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है, जो इसे और भी अधिक पवित्र बनाता है।

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पंचक्रोशी यात्रा 2025 - फोटो : अमर उजाला
पंचक्रोशी यात्रियों के लिए क्या व्यवस्थाएं?
हर वर्ष प्रशासन द्वारा लाखों श्रद्धालुओं की भागीदारी को ध्यान में रखते हुए यात्रा मार्ग पर व्यापक व्यवस्थाएं की जाती हैं। हर पड़ाव पर यात्रियों के लिए नि:शुल्क जल और शुद्ध भोजन की व्यवस्था की गई है। कई सामाजिक संगठन इस कार्य में सहयोग कर रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में प्रत्येक पड़ाव पर प्राथमिक चिकित्सा केंद्र स्थापित किए गए हैं। मोबाइल एम्बुलेंस और डॉक्टरों की टीम भी साथ चलती है। रात्रि विश्राम की व्यवस्था में श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए स्कूल भवन, धर्मशालाओं में व्यवस्था की गई है। महिलाओं और वृद्धजनों के लिए विशेष सुविधा सुनिश्चित की गई है। सुरक्षा और निगरानी के क्षेत्र में पुलिस बल, होमगार्ड और स्वयंसेवकों की तैनाती की गई है ताकि यात्रा शांतिपूर्ण और सुरक्षित रूप से सम्पन्न हो सके।
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पंचक्रोशी यात्रा 2025 - फोटो : अमर उजाला
मुख्य उद्देश्य प्लास्टिक मुक्त यात्रा
इस वर्ष यात्रा को और भी सुगम व पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील बनाने के लिए प्रशासन ने कुछ नई पहल की है। पंचक्रोशी यात्रा में सभी यात्रियों से अनुरोध किया गया है कि वे प्लास्टिक का उपयोग न करें। जगह-जगह पर कचरा पात्र और साफ-सफाई के लिए स्वयंसेवक लगाए गए हैं।
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पंचक्रोशी यात्रा 2025 - फोटो : अमर उजाला
पंचक्रोशी यात्रा मार्ग का पुलिस उपमहानिरीक्षक और पुलिस अधीक्षक ने लिया जायजा 
पंचक्रोशी यात्रा के सफल, सुरक्षित और सुचारु आयोजन के उद्देश्य से पुलिस उपमहानिरीक्षक, उज्जैन रेंज व पुलिस अधीक्षक उज्जैन द्वारा संयुक्त रूप से मार्ग के सभी महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण किया गया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने यात्रा मार्ग के विभिन्न पड़ावों, विश्राम स्थलों, पुलिस सहायता केंद्रों, प्राथमिक उपचार केंद्रों, पेयजल व्यवस्था, साफ-सफाई एवं यातायात प्रबंधन की स्थिति का गहन अवलोकन किया। उन्होंने संबंधित राजस्व, नगर निगम, स्वास्थ्य और पुलिस विभाग के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। पुलिस उपमहानिरीक्षक ने कहा कि पंचक्रोशी यात्रा एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा और सुविधा के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएं। 
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