हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व बताया गया है। साल भर में चार बार नवरात्रि मनाई जाती है। लेकिन उज्जैन में पांच बार यह उत्सव मनाया जाता है। ये उत्सव सिर्फ उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में ही मनाया जाता है। जो महाशिवरात्रि से नौ दिन पहले शुरू होता है।
धार्मिक नगरी उज्जैन को महाकाल की नगरी कहा जाता है। शिवरात्रि के दौरान शिवजी की यह नगरी एक अलग ही अंदाज में नजर आती है। उज्जैन का महाकाल मंदिर शिवजी के जयकारों से गूंज उठता है। साल 2025 में महाशिवरात्रि 26 फरवरी बुधवार के दिन पड़ रही है। शिवरात्रि से पूर्व नवरात्रि तक महाकाल के मंदिर में भगवान महाकाल यानि शिवजी के नौ दिन नौ अलग-अलग रूपों के दर्शन किए जाते हैं।
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पहले दिन हल्दी और शाम को वस्त्र एवं चंदन शृंगार
- फोटो : अमर उजाला
यानि 17 फरवरी से शिव नवरात्रि शुरू हो जाएगी। महाकाल के इन नौ रूपों को देखने के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं। शिव नवरात्रि का समय बहुत खास होता है, जिसके आखिरी दिन शिवजी को दूल्हे के रूप में सजाया जाता है।
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दूसरे दिन बाबा महाकाल का शेषनाग रूप में शृंगार
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शिवरात्रि के दिन भोलेनाथ और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इन नौ दिनों को बहुत विशेष माना जाता है और मंगल गीत गाकर पर्व मनाया जाता है।
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तीसरे दिन महाकाल भक्तों को घटाटोप रूप में दर्शन देंगे
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17 फरवरी से होगी शिव नवरात्र की शुरुआत
ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में 17 फरवरी से शिव नवरात्रि की शुरुआत होगी। 26 फरवरी को महाशिवरात्रि तक भगवान का नौ रूपों में आकर्षक शृंगार किया जाएगा।
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चौथे दिन बाबा महाकाल का छबीना शृंगार किया जाता है
- फोटो : अमर उजाला
ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि पर फाल्गुन कृष्ण पंचमी से फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी तक शिव नवरात्र उत्सव मनाया जाता है। इस बार 17 फरवरी को शिव पंचमी के पूजन के साथ शिव नवरात्र की शुरुआत होगी।
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शिव नवरात्रि के 5वें दिन महाकाल बाबा को होलकर परंपराओं के अनुसार सजाया जाएगा
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बता दें कि सुबह आठ बजे पुजारी कोटितीर्थ कुंड के समीप स्थित श्री कोटेश्वर महाकाल को अभिषेक-पूजन कर हल्दी चढ़ाएंगे। करीब डेढ़ घंटे पूजन के उपरांत सुबह 9.30 बजे से गर्भगृह में भगवान महाकाल की पूजा होगी। पुजारी भगवान महाकाल का पंचामृत अभिषेक कर पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद 11 ब्राह्मणों द्वारा रुद्रपाठ किया जाएगा। इसके बाद दोपहर एक बजे भोग आरती होगी। तीन बजे संध्या पूजा के बाद नौ दिन तक भगवान का अलग-अलग स्वरूपों में विशेष शृंगार किया जाएगा।
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शिव नवरात्रि के छठवें दिन बाबा महाकाल को मनमहेश के रूप में सजाया जाएगा
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यहां शिवरात्रि नहीं, शिव नवरात्रि मनाई जाती है : महेश पुजारी
महाकाल मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि महाशिवरात्रि पर्व को लेकर मान्यता है कि इस दिन शिवजी का देवी पार्वती से विवाह हुआ था। शिव नवरात्रि इसी विवाह के पहले का उत्सव है।
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सातवें दिन बाबा महाकाल माता पार्वती के साथ उमा-महेश के रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं
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ये उत्सव सिर्फ उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में ही मनाया जाता है, जो महाशिवरात्रि से नौ दिन पहले शुरू होता है। इन नौ दिनों में भगवान महाकाल को चंदन का लेप और मेहंदी लगाई जाती है। इसके साथ ही नौ दिनों तक भगवान महाकाल का मोहक शृंगार के साथ ही पूजन, अभिषेक और अनुष्ठान भी किया जाता है।
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आठवें दिन बाबा महाकाल शिव तांडव के रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं
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उन्होंने बताया कि विश्व प्रसिद्ध महाकाल ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है, जो तीसरे नंबर पर आता है। यहां की परंपरा बाकी जगहों से अलग है। 12 ज्योतिलिंर्गों में से महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का एक विशेष महत्व है। महाकाल के बारे में कहा जाता है कि यह पृथ्वी का एक मात्र मान्य शिवलिंग है। यह दक्षिणमुखी होने के कारण इसकी मान्यता और बढ़ जाती है।
यहां शिवरात्रि नहीं शिव नवरात्रि मनाई जाती है, जिस तरह शादी विवाह में परिवार में लोग उत्सव बनाते हैं। वैसे ही महाकाल की नगरी में भी शिव के विवाह पर उत्सव बनाया जाता है। यह एक परंपरा है। यहां अवंतिका क्षेत्र का महत्व भी है। इसलिए अवंतिका नगरी को धार्मिक नगरी भी कहा जाता है। नौ दिन अपने भक्तों को अलग-अलग स्वरूप में महाकाल दर्शन देते हैं और आखरी दिन बाबा का सेहरा सजाकर दूल्हा बनाया जाता है।
शिव नवरात्रि के आखिरी दिन में महाकाल को दूल्हे के रूप में सजाया जाता है
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इन स्वरूपों में दर्शन देंगे बाबा महाकाल
पहला दिन वस्त्र धारण- शिवरात्रि से पहले के नौ दिन विशेष हैं। शिव नवरात्रि के पहले दिन बाबा महाकाल का चंदन से शृंगार किया जाता है और जलाधारी पर हल्दी चढ़ाई जाती है।
दूसरा दिन शेषनाग- दूसरे दिन बाबा महाकाल का शेषनाग रूप में शृंगार किया जाता है। इस दिन बाबा महाकाल भक्तों को शेषनाग रूप में दर्शन देंगे।
तीसरा दिन घटाटोप- तीसरे दिन बाबा महाकाल भक्तों को घटाटोप रूप में दर्शन देंगे।
चौथा दिन छबीना- चौथे दिन बाबा महाकाल का छबीना शृंगार किया जाता है, जो कि एक नवयुवक स्वरूप होता है। बाबा महाकाल का शृंगार एक राजकुमार की तरह किया जाता है।
पांचवां दिन होल्कर- शिव नवरात्रि के पांचवें दिन महाकाल बाबा को होलकर परंपराओं के अनुसार सजाया जाएगा।
छठा दिन मनमहेश- शिव नवरात्रि के छठवें दिन बाबा महाकाल को मनमहेश के रूप में सजाया जाएगा, इस रूप में भगवान शिव के रूप में महाकाल का शृंगार होगा।
सातवां दिन उमा महेश- सातवें दिन बाबा महाकाल माता पार्वती के साथ उमा-महेश के रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इस दिन महाकाल बाबा और मां पार्वती दोनों का स्वरूप भक्तों को दिखता है।
आठवां दिन शिव तांडव- आठवें दिन बाबा महाकाल शिव तांडव के रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इस स्वरूप में महाकाल का रौद्र रूप भक्तों को देखने को मिलता है।
नौवें दिन निराकार- शिव नवरात्रि के आखिरी दिन में महाकाल को दूल्हे के रूप में सजाया जाता है। कई क्विंटल फूलों का सेहरा बाबा को पहनाया जाता है।