गढ़कालिका से कालभैरव मार्ग पर जाने वाले ओखलेश्वर घाट पर श्री हनुमत्केश्वर महादेव का अति प्राचीन मंदिर विद्यमान है, जो कि 84 महादेव में 79वें स्थान पर आता है। मंदिर के पुजारी पंडित केदार मोड़ के अनुसार यह विश्व का एकमात्र ऐसा शिवलिंग है। जहां सरसों का तेल भगवान को अर्पित कर उनका अभिषेक पूजन किया जाता है, और उन्हें तिल के बने पकवानों का ही भोग लगाया जाता है। यह एकमात्र ऐसा मंदिर है जो कि 24 घंटे चालू रहता है। मंदिर में कहीं भी ताला नहीं लगाया जाता है। वैसे तो श्री हनुमत्केश्वर महादेव की महिमा अत्यंत निराली है, जिनके दर्शन करने मात्र से ही चेतन्यता प्राप्त हो जाती है, लेकिन मंगलवार और शनिवार को मंदिर में विशेष पूजन अर्चन करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।