स्कंद पुराण के अनुसार प्रतीहारेश्वर महादेव
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नंदी के कारण शिवलिंग का नाम पड़ा श्री प्रतिहारेश्वर महादेव
श्री प्रतिहारेश्वर महादेव की महिमा अत्यंत निराली है। स्कंद पुराण के अवंतीखंड मे इस बात का उल्लेख मिलता है, कि महादेव का पार्वती से विवाह होने के बाद जब काफी समय तक महादेव तपस्या मे लीन रहे तो देवताओं को इस बात की चिंता हुई। यदि भगवान शिव का कोई पुत्र हुआ तो वह महातेजस्वी होने के साथ ही इस पूरे लोग का नाश कर देगा। सभी देवी देवता इस चिंता से व्याकुल थे, तभी उन्हें गुरुजनों ने यह उपाय बताया कि आप सभी महादेव और पार्वती जी से मिलने जाइए और उन्हीं से इस समस्या का समाधान पूछिए। गुरुजनों के परामर्श पर सभी देवी-देवता मंदिराचल पर्वत पहुंचे तो उन्हें द्वार पर भगवान शिव के परम भक्त नंदी मिले। जिन्हें देखकर देवताओं के राजा इंद्र को लगा कि नंदी कौन है। भगवान शिव से नहीं मिलने देंगे जिसके लिए उन्होंने अग्निदेव को हंस बनकर नंदी से नजरें बचाकर महादेव तक जाने को कहा। हंस के रुप में महादेव तक पहुंचे। अग्निदेव ने देवताओं को जब बताया कि सभी देवतागण उनके द्वार पर खड़े हैं, तो महादेव खुद द्वार पर पहुंचे और उन्होंने बिना जानकारी लिए इस लापरवाही के लिए नंदी को दंड दे दिया। बिना किसी भूल के जब नंदी को दंड मिला तो नंदी पृथ्वी पर गिरकर विलाप करने लगा जिसे सुनकर देवताओं ने ही उन्हें महाकाल वन विराजमान एक चमत्कारी शिवलिंग का पूजन अर्चन करने का सुझाव दिया। जिसके बाद नंदी महाकाल वन पहुंचे। जहां उन्होंने पटनी बाजार स्थित इसी शिवलिंग का पूजन अर्चन किया। भगवान प्रसन्न हो गए और नंदी को वरदान दिया कि आप मेरे इस शिवलिंग को तुम्हारे ही नाम पर यानी प्रतिहार (नंदीगण) के रूप में ही जाना जाएगा। तभी से यह मंदिर श्री प्रतिहारेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध है। इस मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में भक्तजन भगवान का पूजन अर्चन करने पहुंचते हैं।