इंदौर रोड पर आगे तो फोरलेन दिखाई देता है लेकिन होटल और मैरिज गार्डन के पीछे क्षिप्रा नदी है। नदी से 200 मीटर की सीमा में अस्थाई या स्थायी निर्माण नहीं किया जा सकता। ऐसा करने पर सजा का प्रावधान है, लेकिन टोल नाके से लेकर हरिफाटक ब्रिज तक एवं चिंतामण ब्रिज तक होटल वालों ने बिना शासन की अनुमति के पीछे तक स्थाई निर्माण कर लिए हैं। जानकारी के अनुसार अभी त्रिवेणी से लेकर सांवराखेड़ी ब्रिज तक कई होटलों के निर्माण पीछे के हिस्से में कराए गए हैं और यह निर्माण क्षिप्रा नदी के किनारे ग्रीन बेल्ट के 200 मीटर के दायरे में किए गए हैं। जिसकी कोई अनुमति शासन से नहीं ली गई है।
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ग्रीन बेल्ट एरिया में बिना अनुमति हो रहे निर्माण
- फोटो : अमर उजाला
मोक्षदायिनी क्षिप्रा नदी के शुद्धीकरण, संरक्षण, संवर्धन के लिए प्रशासन, नगर निगम और स्मार्ट सिटी कंपनी ने सशक्त प्रयास शुरू किए गए थे। क्षिप्रा में कान्ह का गंदा पानी मिलने से रोकने के लिए कच्चे बांध की परियोजना बनाने के साथ ही क्षिप्रा के 18 घाटों वाले 19 किलोमीटर लंबे ग्रीन बेल्ट एरिया में साइकिल ट्रैक, तितली पार्क, ऊष्मायन केंद्र, कैम्पिंग साइट, वॉच टावर और योग ध्यान केंद्र बनाने की योजना भी तैयार की गई थी। इस दौरान स्मार्ट सिटी कंपनी के वर्तमान सीईओ अंशुल गुप्ता ने कहा था कि 2022 के अंत तक परियोजना धरातल पर आकार ले लेगी। नदी पर अन्य सुविधाओं को भी जुटाया जाएगा लेकिन अब तक यह योजना धरातल पर नहीं आ पाई है। इस योजना के लिए अनुमानित 30 करोड़ रुपयों का बजट भी बताया जा रहा था।
संतो ने कहा था - क्षिप्रा किनारे ग्रीन बेल्ट को बचाओ
मास्टर प्लान 2035 को लेकर रामादल अखाड़ा परिषद के संतों ने कलेक्टर आशीष सिंह से दो वर्ष पहले मुलाकात कर ज्ञापन सौंपकर सिंहस्थ क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने की मांग की थी और क्षिप्रा किनारे ग्रीन बेल्ट की जमीन भी बचाने को कहा था। इस दौरान महंत भगवानदास, महंत डॉ. रामेश्वरदास, महंत रामचंद्रदास, महंत राघवेंद्रदास तथा महंत दिग्विजयदास उपस्थित थे।
कलेक्टर ने कही जांच की बात
टीएल की बैठक में कलेक्टर आशीष सिंह ने भी इन सभी निमार्णों की जांच कर अवैध निर्माण को हटाने व दोषियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने की मांग की थी। कलेक्टर आशीष सिंह ने इस दौरान क्षिप्रा नदी के 200 मीटर क्षेत्र में हो रहे नये निमार्णों को जल्द से जल्द चिह्नित करने की बात भी कही थी।