रंगपंचमी की देर शाम को महाकाल मंदिर में ध्वज पूजन कर ध्वज चल समारोह निकला। विधायक पारस जैन, कलेक्टर आशीष सिंह सहित अन्य अतिथियों ने ध्वज का पूजन किया। इसके बाद बैंड बाजों के साथ चल समारोह निकला, जो रात को वापस मंदिर पहुंचा।
रंगपंचमी की शाम को उज्जैन में भगवान महाकाल का ध्वज चल समारोह निकला। करीब पांच सौ साल पुरानी परंपरा का निर्वहन किया। महाकाल मंदिर में अतिथियों ने ध्वज पूजन किया। इसके बाद मंदिर से शुरू होकर चल समारोह नगर भ्रमण पर निकला। अलग-अलग मार्गों का भ्रमण कर समारोह वापस मंदिर पहुंचा। इस दौरान करीब 18 गेर भी शामिल हुईं।
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ध्वज चल समारोह में भगवान महाकाल का पुष्प मुकुट रहा आकर्षण का केंद्र
- फोटो : सोशल मीडिया
दरअसल, दिनभर रंगपंचमी मनाने के बाद शाम को शहर में विभिन्न स्थानों से 18 गेर निकली। सबसे बड़ी गेर महाकाल की निकली, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने शामिल होकर अपनी कला का प्रदर्शन किया। कोरोना के कारण दो साल से गेर नहीं निकल सकी थी, जिस कारण इस बार गेर में उत्साह और उल्लास नजर आया। शहर में करीब 18 जगह से विभिन्न समाज व संगठनों ने गेर निकाली। गेर में कलाकार लाठी व शस्त्र घुमाकर अपनी कला का प्रदर्शन करते दिखे। शाम करीब 7 बजे महाकाल मंदिर से महाकाल बाबा के मुखोटे के साथ शुरू हुई गेर पुराने शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए रात 10.30 बजे मंदिर पहुंची। इस गेर को देखने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और फूलों से स्वागत किया। महाकाल मंदिर के अतिरिक्त सिंहपुरी, भागसीपुरा, कहारवाड़ी,जयसिंहपुरा,चौबीस खंबा क्षेत्र से विभिन्न समाज व संगठनों की 7 गेर निकली। जीवाजीगंज क्षेत्र से दो और अन्य जगहों से भी 9 गेर निकली।
कलेक्टर और अन्य अतिथियों ने किया ध्वज पूजन
- फोटो : सोशल मीडिया
चल समारोह में शामिल थे 11 ध्वज
गेर के रूप में शौर्य और विजय की 500 साल पुरानी परंपरा निभाई गई। महाकाल मंदिर से ध्वज पूजन कर यह गेर शुरू हुई। महाकाल मंदिर की गेर में शामिल भगवान महाकाल के पुष्प मुकुट की झांकी आकर्षण का केंद्र रही। शाम 7 बजे ध्वज पूजन के बाद श्री महाकालेश्वर वीरभद्र ध्वज चल समारोह निकाला गया। बैंड बाजों के साथ निकले चल समारोह में 11 ध्वज शामिल थे। भगवान वीरभद्र का रथ व भगवान महाकाल के पुष्प मुकुट की झांकी आस्था का केंद्र रही। चल समारोह में बड़ी संख्या में पुजारी,पुरोहित व प्रबुद्धजन शामिल थे। सिंहपुरी से निकली गुर्जरगौड़ ब्राह्मण समाज की गेर में शौर्य व शक्ति के दर्शन हुए। श्री महाकालेश्वर भर्तृहरि विक्रम ध्वज चल समारोह समिति के तत्वावधान में गेर निकाली गई। शाम 7 बजे आताल पाताल भैरव की महाआरती के बाद गेर की शुरुआत हुई। कारवां में तीन बैंड, 21 ध्वज, 21 ढोल, अखाड़े आदि शामिल थे। सिंहपुरी से शुरू होकर गेर प्रमुख मार्गों से होते हुए रामघाट पहुंची। यहां ध्वज पूजन किया गया। इसके बाद चल समारोह नगर भ्रमण के लिए रवाना हुआ। कार्तिक चौक से गुर्जरगौड़ ब्राह्मण समाज की गेर निकली। शाम 7 बजे तोपतोड़ भैरव मंदिर में ध्वज निशान का पूजन किया गया। इसके बाद ढोल ढमाकों के साथ समाजजन ध्वजों को लेकर निकलेंगे तथा समाजजन के घरों पर प्रदर्शन के लिए स्थापित किया। कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी पर 31 मार्च को समाज की बड़ी गेर निकलेगी। भागसीपुरा से औदिच्य ब्राह्मण समाज की गेर निकाली। समाजजनों ने आनंद भैरव मंदिर में ध्वज निशान का पूजन किया। इसके बाद बैंड बाजों के साथ ध्वज चल समारोह निकाला गया।