त्विषा की सास
- फोटो : अमर उजाला
पढ़िए याचिकाकर्ताओं के तर्क
याचिकाकर्ताओं की तरफ से तर्क किया गया कि घटना के बाद त्विषा को नीचे लाने का वीडियो वायरल हुआ था। पूरे वीडियो का सिर्फ उक्त हिस्सा ही मीडिया में जारी किया गया। जिसमें नीचे लाते समय उसे रास्ते में सीपीआर दिया जा रहा था। एक और तर्क दिया गया कि लगभग 50 मिनट का समय त्विषा को नीचे लाने में लगा, तत्काल पास के अस्पताल को फोन किया जाता तो उसे बचाया जा सकता था।
मायके बात कर रही थी त्विषा, पीछे से चिल्ला रहा था पति
याचिकाकर्ताओं की तरफ से तर्क किया गया कि गर्भवती होने के संबंध में 17 अप्रैल को त्विषा को पता चला। इसके बाद पति समर्थ सिंह बच्चा किसी और का होने की बात करते हुए त्विषा पर दबाव बनाने लगा। जबकि वह बच्चे को जन्म देना चाहती थी। पति समर्थ सिंह ड्रग्स लेता था और इसके लिए वह त्विषा से रुपये की मांग करता था। वह उसके साथ सदैव मारपीट करता था। घटना दिनांक 12 मई की रात को लगभग 9.40 बजे वह अपने मायके पक्ष से बात कर रही थी तो उसका पति पीछे से चिल्ला रहा था। इसके बाद उसने फोन काट दिया था और रात लगभग 12.05 बजे मायके पक्ष वालों ने फोन किया तो गिरिबाला सिंह ने बताया कि त्विषा की मौत हो गई है। इसके अलावा तर्क दिए गए कि शादी के समय गिरिबाला सिंह को दो लाख रुपये दिए गए थे। इसके अलावा वह त्विषा के 20 लाख रुपये के शेयर अपने तथा बेटे के नाम पर करवाना चाहती थीं। उनकी हैसियत के अनुसार दहेज नहीं लेने का ताना दिया जाता था। नौकरी छूटने के बाद वह बहू को आर्थिक कमाई नहीं होने पर भविष्य खराब होने की बात कहते थे।
ये भी पढ़ें-
पति समर्थ सिंह को सीबीआई ने लिया रिमांड पर, विरोधाभासी बयानों पर कराएगी आमना-सामना