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Twisha Sharma Case: सास गिरिबाला की अग्रिम जमानत के खिलाफ पौने तीन घंटे हाईकोर्ट में चली सुनवाई, आदेश सुरक्षित

Wed, 27 May 2026 07:59 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

Twisha Sharma Case MP High Court : हाईकोर्ट में त्विषा शर्मा दहेज हत्या मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग पर करीब पौने तीन घंटे सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं ने सबूत मिटाने, जांच में सहयोग न करने और प्रताड़ना के आरोप लगाए। सीबीआई ने भी जमानत निरस्त करने की मांग की। अदालत ने सभी पक्ष सुनकर फैसला सुरक्षित रखा।

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त्विषा शर्मा मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई - फोटो : अमर उजाला
भोपाल के बहुचर्चित त्विषा शर्मा की दहेज हत्या के अपराध में आरोपी सास तथा पूर्व भोपाल जिला व सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत के खिलाफ प्रदेश सरकार तथा मृतका के पिता की तरफ से दायर की गई याचिकाओं पर हाईकोर्ट में बुधवार को लगभग पौने तीन घंटे तक सुनवाई हुई। हाईकोर्ट जस्टिस देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखने के निर्देश जारी किए हैं।



गौरतलब है कि प्रदेश सरकार की तरफ से भोपाल की पूर्व जिला व सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को दहेज हत्या के अपराध में मिली अग्रिम जमानत को निरस्त किए जाने की मांग करते हुए उक्त याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं की तरफ से तर्क दिया गया कि वे अग्रिम जमानत की शर्तों का पालन नहीं कर रही हैं। पुलिस ने उन्हें 13 मई से 23 मई के बीच पांच नोटिस दिए थे। इसके अलावा उन्होंने 18 मई को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मृतका त्विषा के चरित्र पर गंभीर आरोप लगाए थे। वे भौतिक साक्ष्य जांच एजेंसी को उपलब्ध नहीं करवा रही हैं। जमानत मिलने के बाद भौतिक साक्ष्य को नष्ट कर रही हैं।

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त्विषा की सास - फोटो : अमर उजाला
पढ़िए याचिकाकर्ताओं के तर्क
याचिकाकर्ताओं की तरफ से तर्क किया गया कि घटना के बाद त्विषा को नीचे लाने का वीडियो वायरल हुआ था। पूरे वीडियो का सिर्फ उक्त हिस्सा ही मीडिया में जारी किया गया। जिसमें नीचे लाते समय उसे रास्ते में सीपीआर दिया जा रहा था। एक और तर्क दिया गया कि लगभग 50 मिनट का समय त्विषा को नीचे लाने में लगा, तत्काल पास के अस्पताल को फोन किया जाता तो उसे बचाया जा सकता था।

मायके बात कर रही थी त्विषा, पीछे से चिल्ला रहा था पति
याचिकाकर्ताओं की तरफ से तर्क किया गया कि गर्भवती होने के संबंध में 17 अप्रैल को त्विषा को पता चला। इसके बाद पति समर्थ सिंह बच्चा किसी और का होने की बात करते हुए त्विषा पर दबाव बनाने लगा। जबकि वह बच्चे को जन्म देना चाहती थी। पति समर्थ सिंह ड्रग्स लेता था और इसके लिए वह त्विषा से रुपये की मांग करता था। वह उसके साथ सदैव मारपीट करता था। घटना दिनांक 12 मई की रात को लगभग 9.40 बजे वह अपने मायके पक्ष से बात कर रही थी तो उसका पति पीछे से चिल्ला रहा था। इसके बाद उसने फोन काट दिया था और रात लगभग 12.05 बजे मायके पक्ष वालों ने फोन किया तो गिरिबाला सिंह ने बताया कि त्विषा की मौत हो गई है। इसके अलावा तर्क दिए गए कि शादी के समय गिरिबाला सिंह को दो लाख रुपये दिए गए थे। इसके अलावा वह त्विषा के 20 लाख रुपये के शेयर अपने तथा बेटे के नाम पर करवाना चाहती थीं। उनकी हैसियत के अनुसार दहेज नहीं लेने का ताना दिया जाता था। नौकरी छूटने के बाद वह बहू को आर्थिक कमाई नहीं होने पर भविष्य खराब होने की बात कहते थे।

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त्विषा शर्मा मामले में पति और सास पर सीबीआई का शिकंजा कसता जा रहा है। - फोटो : अमर उजाला
एफआईआर के पहले ही मांग ली जमानत
कोर्ट को बताया गया कि पति और सास  की तरफ से अग्रिम जमानत के लिए एफआईआर दर्ज होने के पहले ही 14 मई को आवेदन किया गया था। कटारा हिल्स पुलिस द्वारा 15 मई की रात को लगभग 2.30 बजे एफआईआर दर्ज की गई थी। एफआईआर दर्ज होने के कुछ घंटों बाद ही गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत का लाभ मिल गया। सरकार की तरफ से न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया कि अग्रिम जमानत पर नहीं, बल्कि मिनी ट्रायल की गई है। जिला कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि ऐसा संभव प्रतीत नहीं होता है कि गिरिबाला सिंह ने शादी के समय दो लाख की मांग की है। इसके अलावा मृतका तथा उसके मायके पक्ष के बीच हुए वॉट्सएप चेट में त्विषा ने खुद उल्लेख किया है कि अम्मा अच्छी हैं।

सीबीआई ने की ये मांग
सीबीआई की तरफ से इंटर विनर बनने का आवेदन पेश करते हुए अग्रिम जमानत याचिका निरस्त करने मांग की गई। सीबीआई की तरफ से तर्क दिया गया कि त्विषा के पहले पोस्टमार्टम के दौरान गिरिबाला सिंह की रिश्ते में लगने वाली बहन व एक अन्य व्यक्ति मौजूद था। जिन्हें उपस्थित नहीं रहना चाहिए था और यह जांच का विषय है। इसके अलावा दोनों आरोपियों को क्रॉस एग्जामिनेशन  के लिए उनकी अभिरक्षा जरूरी है।

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त्विषा की सास गिरिबाला सिंह - फोटो : अमर उजाला
अब गिरिबाला सिंह के तर्क पढ़िए
अनावेदिका गिरिबाला सिंह की तरफ से तर्क दिया गया कि डॉक्टरों ने एंजायटी, ड्रग्स के कारण त्विषा की स्थिति को देखते हुए गर्भपात की गोलियां दी थीं। त्विषा अकेले रहना चाहती थी और जिस मंजिल में उसने फांसी लगाई वहीं उसका किचन, बाथरूम व बेडरूम था। घटना के दूसरे दिन 13 तारीख को पुलिस ने उसे सीज कर दिया था। उनकी तरफ से तर्क दिया गया कि गिरिबाला सिंह तथा उसके बेटे ने यूपीआई के माध्यम से शादी के बाद त्विषा को सात लाख रुपये से अधिक दिए हैं। त्विषा ने कभी भी अपनी सास पर दहेज मांगने तथा प्रताड़ित करने की बात मायके पक्ष वालों से नहीं कही थी। त्विषा के सभी आरोप अपने पति के खिलाफ हैं, सास के खिलाफ नहीं। इसके अलावा वह जांच में पूरा सहयोग कर रही हैं। 

प्रदेश सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता व महाधिवक्ता प्रशांत सिंह, याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लुथरा तथा अनावेदिका की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता रामा कृष्णन पैरवी के लिए उपस्थित हुए।
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