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MP Special: काले पानी से काले हीरे तक सफर तय कर ऊर्जा राजधानी बना सिंगरौली, अर्थव्यवस्था को दे रहा नई रफ्तार

Sat, 01 Nov 2025 01:31 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिंगरौली

सार

प्रदेश का सिंगरौली जिला आज देश की ऊर्जा राजधानी बन चुका है। कोयले की खदानों से लेकर देश के सबसे बड़े थर्मल पावर प्लांट तक, सिंगरौली अब भारत को रोशन करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
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देश की ऊर्जाधानी सिंगरौली - फोटो : अमर उजाला
मध्य प्रदेश का सिंगरौली जिला अब "काले पानी से काले हीरे" तक का सफर तय कर प्रदेश की आर्थिक राजधानी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह जिला इंदौर के बाद प्रदेश सरकार को सबसे अधिक राजस्व देने वाला जिला बन गया है। अपार खनिज संपदाओं और लगातार बढ़ते उद्योगों के कारण सिंगरौली देश के विकास मानचित्र पर एक प्रमुख ऊर्जा केंद्र के रूप में उभर रहा है।
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देश का सबसे बड़ा थर्मल पावर प्लांट - फोटो : अमर उजाला
देश का सबसे बड़ा थर्मल पावर प्लांट सिंगरौली में
भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में ऊर्जा की अहम भूमिका है और इस ऊर्जा उत्पादन में सिंगरौली की भूमिका सबसे बड़ी है। यहां स्थित विंध्याचल थर्मल पावर स्टेशन देश का सबसे बड़ा थर्मल पावर प्लांट है, जिसकी स्थापित क्षमता 4,760 मेगावाट है। यह पावर स्टेशन एनटीपीसी द्वारा संचालित है और 1987 में इसकी स्थापना की गई थी। यह संयंत्र न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

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काले पानी से काले हीरे तक का सफर - फोटो : अमर उजाला
कोयले की खदानों और बिजलीघरों के अलावा सिंगरौली में सोने की खदानें भी हैं, जिससे यह इलाका राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है। यहां विकास की रफ्तार इतनी तेज है कि इसे ऊर्जाधानी कहा जाने लगा है।

स्थानीय लोगों की कुर्बानियों से बना विकास का रास्ता
विकास की इस चमक के पीछे स्थानीय लोगों की कुर्बानियां भी छिपी हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अंजनी पांडेय बताते हैं कि 1962 की बरसात के दौरान जब रेनूकुट की पहाड़ियों में पानी भर गया, तो चारों ओर तबाही का मंजर था। 1965 में झींगुरदह कोयला खदान खुलने के बाद एक-एक कर खदानें और पावर प्लांट बनते गए, जिससे हजारों लोगों को विस्थापित होना पड़ा। अब मोरबा क्षेत्र में भी कोयला खनन शुरू होने जा रहा है।

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राजस्व में अहम योगदान - फोटो : अमर उजाला
सिंगरौली विधायक रामनिवास शाह का कहना है कि आज यह क्षेत्र देश को रोशन करने में अहम भूमिका निभा रहा है। यहां एनसीएल की 10 परियोजनाएं संचालित हैं, जो देश के कुल बिजली उत्पादन का लगभग 10 प्रतिशत अकेले आपूर्ति कर रही हैं।

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यहां निकलता है बिटुमिनस कोयला - फोटो : अमर उजाला
राजस्व में अहम योगदान
वित्तीय वर्ष 2024-25 में सिंगरौली जिले ने मध्य प्रदेश सरकार को 4,080 करोड़ रुपये का राजस्व दिया, जिससे यह प्रदेश के शीर्ष राजस्व देने वाले जिलों में शामिल हो गया। यह राजस्व मुख्यतः खनन और ताप विद्युत उद्योगों से प्राप्त होता है।
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प्रमुख ऊर्जा केंद्र सिंगरौली - फोटो : अमर उजाला
उच्च गुणवत्ता का कोयला
एनसीएल की खदानों में निकलने वाला बिटुमिनस कोयला उच्च गुणवत्ता का होता है। यहां की झींगुरदह खदान में सबसे मोटी परत पाई जाती है। सिंगरौली की विशेषता यह है कि यहां कोयले की तीन परतें मिलती हैं, जिससे उत्पादन लगातार बढ़ता रहता है। वर्तमान में एनसीएल प्रतिदिन लगभग 3.5 लाख मीट्रिक टन कोयला उत्पादन कर रहा है।
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