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Navratri 2022: मां विजयासन का पावन धाम नवरात्र के लिए तैयार, यहां पूरी होती हैं सभी मनोकामनाएं

Mon, 26 Sep 2022 08:14 AM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर

सार

एक हजार फीट ऊंचाई पर विराजमान विजयासन मैया का दरबार सलकनपुर नवरात्र के लिए तैयार है। इस बार दर्शन करने इस शारदीय नवरात्र भक्तों का हुजूम उमड़ेगा।
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विजयासन मैया का दरबार - फोटो : Social Media
मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में विंध्याचल के पहाड़ पर एक हजार फीट ऊंचाई पर विराजमान विजयासन मैया का दरबार सलकनपुर नवरात्र के लिए तैयार है। प्राचीन श्रीदेवी धाम शक्ति पीठ सलकनपुर देश और प्रदेश के लाखों श्रद्धालुओं की अस्था का केन्द्र है। नवरात्रि में प्रतिदिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां आकर माता के दरबार में स्तुति कर अपनी मनोकामना पूर्ण करेंगे। नवरात्र पर्व 26 सितंबर से शुरू हो रहे हैं। नवरात्र पर्व को लेकर इस साल भक्तों में काफी उत्साह देखा जा रहा है।
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4-5 लाख भक्तों के आने की उम्मीद - फोटो : Social Media
कोरोना के सभी प्रतिबंध हटने के बाद इस साल प्रदेश भर में 4-5 लाख भक्तों के आने की उम्मीद है। नौ दिवसीय उत्सव के लिए सलकनपुर में तमाम सुविधाएं जुटाई जा रहीं हैं। खासकर बुजुर्ग और अन्य कमजोर व्यक्ति अंडर पास सहित ट्राइसाइकिल के जरिए पहुंचकर मैया के दर्शन आसानी से कर सकेंगे। 80 सीसीटीवी से भक्तों पर नजर रखी जाएगी। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भी किए जा रहे हैं।
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मध्यप्रदेश की हृदयस्थली पुण्य सलिला मां नर्मदा - फोटो : Social Media
मध्यप्रदेश की हृदयस्थली पुण्य सलिला मां नर्मदा के तट और सीहोर जिले की बुदनी तहसील से 25 किलोमीटर और होशंगाबाद से 35 किलोमीटर और राजधानी भोपाल से 70 किलोमीटर दूरी पर विंध्याचल की हसीन वादियों में प्रकृति ने अपनी अनमोल छटा बिखेरी है। जहां देवीधाम सलकनपुर है। चारों ओर मनोहारी पर्वत श्रृंखलाएं हैं, जिनमें एक पर्वत पर मां विंध्यवासिनी विजयासेन देवी का भव्य मंदिर बना हुआ है।

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भक्तों की कुलदेवी - फोटो : Social Media
शारदीय और चैत्रीय नवरात्रि में मां की चौखट पर माथा टेकने दूरदराज से लाखों लोग आते हैं और हरियाली से भरे इस 1000 फीट ऊंचे पर्वत पर अलौगिक सौंदर्य के बीच मां की सुंदर प्रतिमा के दर्शन, परिक्रमा, वंदना, स्तुति कर अपने मन की मुरादें पूरी पाते हैं। अनेक भक्तों की यह कुलदेवी भी हैं, इसलिए यहां भक्तों की भीड़ ज्यादा उमड़ती है। जानकारों के मुताबिक, मां विजयासन माता पार्वती का ही अवतार-स्वरूप है। मां ने रक्तबीज नामक राक्षस का वध कर सृष्टि की रक्षा की थी।
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6,000 साल पुराना है मंदिर - फोटो : Social Media
मान्यता है कि यह मंदिर 6,000 साल पुराना है, जहां जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंचने पर इस मंदिर का जीर्णोद्धार अनेक बार किया जा चुका है। इसकी व्यवस्था भोपाल नवाब के संरक्षण में होती थी, तब वहां पर अखंड धूनी और अखंड ज्योति स्थापित की जा चुकी थी, जो सालों से आज भी प्रज्वलित है। गर्भगृह में देवी की प्रतिमा स्वयंभू है, जिसे किसी के द्वारा तराशा नहीं गया, परंतु बाद में चांदी के नेत्र एवं मुकुट आदि से देवी को सजाया गया है।
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दर्शन के लिए पहले से अंडर पास बना - फोटो : Social Media
मातारानी की दर्शन के लिए पहले से अंडर पास बनाया हुआ है। रैंप भी बनाया है, इसके लिए पास से एक रोड बनाया है और इसी पर वाहन पार्किंग भी है। बुजुर्गों और बीमार लोगों को मंदिर के तक पहुंचाने एवं तुलादान के लिए भारी सामान लेकर पहाड़ पर पहुंचने अंडरपास बनाया है। मंदिर परिसर में व्हील चेयर के इंतजाम भी रखे गए हैं। सुविधाएं के कारण मंदिर गर्भगह तक पहुंचने एवं दर्शन करने में अब कम समय लगता है।
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विकास कार्य के लिए मिले 50 करोड़ - फोटो : Social Media
सलकनुपर मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष महेश उपाध्याय ने बताया, सीएम ने तीन महीने पहले 50 करोड़ रुपये सलकनपुर धाम में विकास कार्यों के लिए दिए थे। इनमें से 30 करोड़ से मंदिर परिसर सहित मुख्य सड़क के किनारे नीचे के हिस्से में निर्माण विकास कार्य चल रहे हैं। 20 करोड़ की राशि आना शेष है। इस राशि से जो काम पूरे होने हैं, उनमें दो पहिया, चार पहिया वाहन, सुलभ कॉम्पलेक्स जो नीचे से लेकर ऊपर मंदिर गर्भ गृह तक के रास्ते पर बनेंगे।
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