मध्य प्रदेश के सतना के एक ऐसी प्रतिभा का चयन खेलो इंडिया यूथ गेम्स के लिए हुआ है, जिसकी कहानी किसी को भी प्रेरणा दे सकती है। हम बात कर रहे हैं सतना के उभरते जैवलीन थ्रोअर हिमांशु मिश्रा की। हिमांशु 4 जून से 15 जून तक पंचकुला हरियाणा में होने वाले खेलो इंडिया यूथ गेम्स में प्रतिभा दिखाएंगे। इन गेम्स को खेलों का महाकुंभ भी कहा जाता है।
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सतना के उभरते जैवलीन थ्रोअर हिमांशु मिश्रा ने लकड़ी का भाला बनाकर अभ्यास किया।
- फोटो : सोशल मीडिया
मध्य प्रदेश के सतना के एक ऐसी प्रतिभा का चयन खेलो इंडिया यूथ गेम्स के लिए हुआ है, जिसकी कहानी किसी को भी प्रेरणा दे सकती है। हम बात कर रहे हैं सतना के उभरते जैवलीन थ्रोअर हिमांशु मिश्रा की। हिमांशु 4 जून से 15 जून तक पंचकुला हरियाणा में होने वाले खेलो इंडिया यूथ गेम्स में प्रतिभा दिखाएंगे। इन गेम्स को खेलों का महाकुंभ भी कहा जाता है।
हिमांशु को इस मुकाम तक पहुंचने में काफी संघर्ष करना पड़ा है। आर्थिक तंगी के चलते भाला नहीं ला सकते थे तो उन्होंने लकड़ी का भाला बनाकर प्रैक्टिस की है। मैदान नहीं होने से आम के बगीचे में पसीना बहाया। कसरत के लिए घर पर ही कांक्रीट के डम्बल्स बना लिए। गांववालों के ताने सुने। सतना जिले में रामपुर बघेलान के एक छोटे से गांव बड़ा बरहा में किसान विनय मिश्रा और माया मिश्रा के घर जन्मे महज 17 साल के हिमांशु भाला फेंक में अब तक 3 गोल्ड और 1 सिल्वर मेडल अपने नाम कर चुके हैं।
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17 साल के हिमांशु भाला फेंक में अब तक 3 गोल्ड और 1 सिल्वर मेडल अपने नाम कर चुके हैं।
- फोटो : सोशल मीडिया
जैवलीन थ्रोअर बनने के लिए शारीरिक क्षमता की बड़ी जरूरत थी। इसके लिए हिमांशु हर रोज करीब 5 से 7 किलोमीटर दौडऩे लगा और साथ-साथ दोस्तों की मदद से घर पर ही देसी जिम बनाया। जिम में उसने कांक्रीट के डम्बल्स और अन्य साजो सामान बनाए। कसरत को भी हिमांशु ने अपने जीवन में शामिल कर लिया। लकड़ी के भाला से वह धीरे-धीरे प्रैक्टिस को तेज करता गया।
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हिमांशु को इस मुकाम तक पहुंचने में काफी संघर्ष करना पड़ा है। माता-पिता ने भी सपोर्ट किया।
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माधवगढ़ में एक निजी स्कूल के 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले हिमांशु ने बताया कि कोहनी की नसों में खिंचाव की वजह से 5-6 माह गेम भी बंद करना पड़ा। एक समय लगा सबकुछ खत्म हो गया। हालांकि लगातार अभ्यास से अब उसे ऐसी समस्याओं से सामना नहीं करना पड़ता। हिमांशु अब बीते पांच माह से राजस्थान में कोच खडग़ सिंह से जैवलीन की बारीकियां सीख रहे हैं। हिमांशु ने बताया कि पहले उसे दौड़ना काफी पसंद था पर स्कूल में दूसरों को भाला फेंकते देख उसका खिंचाव उस ओर हो गया। लकड़ी का भाला बनाकर अभ्यास किया।
हिमांशु ने बताया कि पहले उसे दौड़ना काफी पसंद था पर स्कूल में दूसरों को भाला फेंकते देख उसका खिंचाव उस ओर हो गया।
- फोटो : सोशल मीडिया
हिमांशु मिश्रा ने 2021 में गुवाहाटी में आयोजित 36वें जूनियर नेशनल में जैवलीन थ्रो के जरिए में गोल्ड मेडल अपने नाम किया तो रायपुर में 32वें वेस्ट जोन रायपुर में स्वर्ण पदक जीतने में कामयाबी हासिल की। एमपी यूथ चैम्पियनशिप में फिर गोल्ड झटक लिया। 8 मई को जमशेदपुर में हुई फोर्थ ओपन इंडियन जैविलीन चैलेंज में हिमांशु ने 66.40 मीटर भाला फेंककर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। खिलाड़ी ने इसका श्रेय खेल समन्वयक ज्योति तिवारी और एसपी धर्मवीर सिंह को दिया जिन्होंने उसका बड़ा सपोर्ट किया।