सागर का अनूठा शिव मंदिर
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राहतगढ़ का इतिहास
राहतगढ़ का नाम मुगलकाल में मिला, जिसका अर्थ है 'शांति का गढ़ या स्थल'। हालांकि, इस कस्बे का प्राचीन इतिहास स्थानीय स्तर पर अधिक ज्ञात नहीं है। लोग इसे महाभारत काल और आल्हा-ऊदल के समय से जोड़ते हैं। ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार यहां परमार, चंदेल, गौंड और मुगल राजाओं का आधिपत्य रहा। 18वीं शताब्दी में यह सिंधिया के हाथ में चला गया और बाद में अंग्रेजों के कब्जे में रहा। राहतगढ़ में परमार वंश के राजा भोज के उत्तराधिकारी जयसिंह के समय का एक खंडित शिलालेख मिला था, जिसमें इस जगह का नाम "उपराहड मंडल" लिखा है।
मंदिर की विशेषताएं
यह शिव मंदिर पूर्णतः वास्तु शास्त्र के हिसाब से पत्थर से निर्मित है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर नंदी विराजमान हैं, और गर्भ गृह में शिवलिंग स्थापित है। इस शिवलिंग को एक ही पत्थर पर निर्मित किया गया है। मुख्य शिवलिंग की जलहरी में छोटे-छोटे 108 पूर्ण शिवलिंग स्थापित हैं, जो हिंदू मान्यताओं में दुर्लभ माने जाते हैं। मंदिर के वर्तमान पुजारी बबलू महाराज और उनके पूर्वज बताते हैं कि इस शिवलिंग पर एक लोटा जल चढ़ाने से 108 शिवलिंगों का स्वतः अभिषेक हो जाता है। इसके अलावा, मंदिर की एक परिक्रमा करने से 108 परिक्रमा का फल प्राप्त होता है।