पति के साथ रूपल
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गौरतलब है कि रूपल सादानी ने 17 महीनों का वेतन लगभग 81,700 पुलवामा हमले में शहीद हुए सैनिकों के परिवारों को दान कर दिया था। यह कदम भी उनके देशप्रेम और कर्तव्यनिष्ठा का परिचायक है। भारतीय संस्कृति में रक्षा बंधन सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि भावनाओं और कर्तव्यों का पर्व है। ऐसे में रूपल सादानी जैसी महिलाएं न केवल इस परंपरा को जीवित रख रही हैं, बल्कि उसे एक नया आयाम भी दे रही हैं।