कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर मां नर्मदा का आंचल दीपों से सजा हुआ था, और नर्मदा के शीतल जल में तैरते दीपों का दृश्य मंत्रमुग्ध कर देने वाला था। मां नर्मदा की संगीत में आरती से निमाड़ उत्सव का आगाज हुआ।
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निमाड़ उत्सव पर महेश्वर किले का नजारा
- फोटो : नरेंद्र चौधरी
देवी अहिल्या के 300वीं जयंती को समर्पित निमाड़ उत्सव का आगाज मां नर्मदा की संगीत में आरती से हुआ। इस अवसर पर उज्जैन के कलाकार दिनेश शर्मा ने संगीत की लय पर मां नर्मदा की आरती प्रस्तुत की, जिसे देख दर्शकों ने करतल ध्वनि से नर्मदा तट को गूंजायमान कर दिया। तीन दशकों से आयोजित होने वाले इस उत्सव में देश के बड़े कलाकारों ने अपनी कला का मंचन किया है, जो इस उत्सव की गरिमा को और बढ़ाते हैं।
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नर्मदा घाटों पर हुई सजावट
- फोटो : अमर उजाला
निमाड़ उत्सव का शुभारंभ मध्य प्रदेश शासन के राज्य मंत्री विश्वास सारंग, जिले के प्रभारी मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, राज्यमंत्री अनुबाई तंवर, सांसद गजेंद्र पटेल, खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल, विधायक राजकुमार मेव, विधायक सचिन बिरला और विधायक बालकृष्ण पाटीदार की उपस्थिति में हुआ। मां नर्मदा तट का अहिल्या घाट विद्युत रोशनी से जगमगा रहा था, जो दर्शकों के लिए एक अद्भुत दृश्य था। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर मां नर्मदा का आंचल दीपों से सजा हुआ था, और नर्मदा के शीतल जल में तैरते दीपों का दृश्य मंत्रमुग्ध कर देने वाला था।
द्वितीय चरण में मुंबई के सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक सुदेश भोसले और उनके साथियों ने संगीत की स्वर लहरियों के साथ एक सुंदर प्रस्तुति दी, जिससे नर्मदा तट पर उपस्थित सभी दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
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महेश्वर के नर्मदा घाट दीपकों से रोशन हुए
- फोटो : अमर उजाला
सुंदर सजीली नौकाओं ने मन मोहा
निमाड़ उत्सव के तहत खेल प्रतियोगिताओं में नौका सजावट का आयोजन किया गया, जिसमें 8 नावों को नविको ने सजाया। इन नावों की आकर्षक सजावट को देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। सजीली नौकाओं में बैठकर दर्शनार्थियों ने सेल्फी ली और नर्मदा तट पर उत्सव का आनंद लिया।
कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन
आज, उत्कृष्ट विद्यालय के मैदान पर कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसका शुभारंभ विधायक राजकुमार मेव ने किया। प्रतियोगिता में कई टीमों ने भाग लिया और शानदार खेल का प्रदर्शन किया।
निमाड़ महोत्सव के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं
- फोटो : अमर उजाला
सुदेश भोसले का गायन सफर
सुदेश भोसले, जो अब फिल्मी दुनिया के जाने-माने पार्श्व गायक बन चुके हैं, ने अपने गायन सफर के बारे में बताया। उनका जन्म 1 जुलाई 1960 को मुंबई में हुआ था। सुदेश जी ने मिमिक्री से गायन की दुनिया में कदम रखा। 1974 से लेकर 1984 तक उन्होंने पोस्ट पेंटिंग का काम किया। एक दिन आर्केस्ट्रा में गायन करते हुए आशा भोसले ने उन्हें सुना और फिल्म "जलजला" से गायन की शुरुआत करवाई। बाद में, आरडी बर्मन, मन्नाडे और अमिताभ बच्चन जैसी हस्तियों से भी उन्हें परिचय मिला। सुदेश भोसले ने "अजूबा", "सौदागर", "तिरंगा", "हाउसफुल", और "शमशेर 4" जैसी फिल्मों में गाने गाए और आज वे पार्श्व गायन की दुनिया में एक चमकते सितारे के रूप में स्थापित हैं।