इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में चल रहे मप्र स्टार्टअप कॉन्क्लेव के अलग-अलग सत्रों में विशेषज्ञ अपनी बात रख रहे हैं। स्टार्टअप क्या है और कैसे शुरू किया जाए, क्या चुनौतियां रहती है,आदि विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।
मप्र स्टार्टअप कॉन्क्लेव के दौरान युवाओं में खूब उत्साह देखा जा रहा है। स्टार्टअप को लेकर रूचि नजर आ रही है। शुक्रवार सुबह से सत्र चल रहे हैं। इसमें विशेषज्ञ बता रहे हैं कि स्टार्टअप कैसे शुरू किया जाए, किन बातों का ध्यान रखा जाए, क्या चुनौतियां हो सकती है।
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उद्घाटन के बाद अतिथियों ने किया प्रदर्शनी का अवलोकन
- फोटो : सोशल मीडिया
सुबह करीब 11 बजे कॉन्क्लेव की शुरुआत हुई। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा ने यहां लगाई गई प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर सांसद शंकर लालवानी, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के सचिव पी नरहरि, संचालक विशेष गढ़पाले भी उपस्थित थे। प्रदर्शनी में नए स्टार्टअप द्वारा अपने इनोवेशन और उद्यम को प्रदर्शित किया गया हैं। उद्योग मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा एवं सांसद शंकर लालवानी ने प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।
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विद्यार्थी व युवा वर्ग ने दिखाई खास रूचि
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बता दें कि ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में हो रहे कार्यक्रम में एक कुल पांच सेशन हो रहे हैं। चार अलग-अलग कमरों में स्टार्टअप संचालक और विद्यार्थी बैठे हुए है। करीब 500 स्टार्टअप को कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है। ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर के बेसमेंट क्षेत्र में 126 स्टाल भी स्टार्टअप संचालकों ने लगाए हैं। यहां बताया जा रहा है कि वे किस क्षेत्र के लिए काम करते हैं और उन्हें विस्तार की जरूरत क्यों हैं। कार्यक्रम में कई निवेशक भी आए हुए हैं जिनकी निगाह अच्छे स्टार्टअप पर है। वे भी स्टॉल पर उत्पादों की जानकारी ले रहे हैं।
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स्पीड मेंटरिंग सत्र में बताया गया मेंटर का महत्व
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मेंटर को साथ में रखें और सलाह लेते रहें
प्रदर्शनी के पहले सत्र में स्पीड मेंटरिंग सत्र हुआ। इसमें स्टार्टअप्स, शैक्षणिक संस्थानों तथा स्टार्टअप स्पेस के प्रमुख लीडर्स के साथ खुला संवाद किया। इस संवाद में जाना कि स्टार्टअप क्या होता है और कैसे इसे शुरू किया जा सकता है। द इंडस एंटरप्रेन्योर मध्यप्रदेश के अध्यक्ष प्रदीप करमरकर ने विद्यार्थियों से कहा कि आपके पास कितनी भी ऊर्जा और ज्ञान हो लेकिन मेंटर नहीं है तो आपको आगे बढ़ने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कई स्टार्टअप की यह परेशानी होती है कि उन्हें जल्द फंडिंग चाहिए होती है लेकिन वे कभी भी मेंटरशिप नहीं चाहते। उन्हें पता ही नहीं होता कि उनके स्टार्टअप में क्या कमियां है और उसे कैसे दूर किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि मेंटर को साथ में रखें और उनसे सलाह लेते रहे।
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स्टार्टअप कैसे शुरू करें सत्र में बात रखते हुए सुनील गोयल
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प्रतिभावान लोगों को जोड़ना जरूरी
इसके बाद स्टार्टअप कैसे शुरू करें सत्र हुआ। इसमें अलग-अलग विशेषज्ञों ने अपनी बात रखी। एयरटेल के लीडरशीप रोल में रहे एंजल इन्वेस्टर्स के सुनील गोयल ने बताया कि मुझे इंदौर से बहुत प्रेम मिला। 2005 में मैं तीन साल के लिए इंदौर आया था। तब भारती एयरटेल में चीफ ऑपरेशन ऑफिसर था। अपने अनुभवों को साझा करते हुए गोयल ने बताया कि स्टार्टअप की परिभाषा है कि कोई भी नया बिजनेस शुरू करना। इसके लिए हमारा दृष्टिकोण बहुत जरूरी है। फंडिंग सबसे पहली चीज है। इसमें एक बिजनेस एंटरप्रेन्योर होता है। एंटरप्रेन्योर वेंचर में कोशिश रहती है कि सौ-हजार लोगों को रोजगार दें जबकि बिजनेस में यह संख्या कम हो सकती है। सबसे खास यह है कि स्टार्टअप की शुरुआत में ये ध्यान रखना पड़ेगा कि इसका इंपेक्ट लाखों-करोड़ों लोगों पर हो। स्टार्टअप के लिए सबसे जरुरी है कि प्रतिभावान लोग आपसे जुड़े। वे योग्य हो। आपके लिए काम करने वाले हो। कोई भी आपके साथ तभी काम करेगा जब आपका विजन क्लीयर होगा। इसलिए स्टार्टअप करना चाहते हैं तो ऐसे लोग जोड़ो जो आपकी मजबूत टीम बने। जो आपसे बेहतर हो। आइडिया के बारे में ग्लोबली रिसर्च करो। कांपीटिटर को देखो। मेरी भी गलती हुई कि जब मैंने अपना एंटरप्रेन्योर शुरू किया तो दायरा सीमित रखा। इसलिए दायरा बढ़ाएं। सीखें कि क्या बेहतर कर सकते हैं।
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संबोधित करते हुए ध्रुवनाथ
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अच्छा रिसर्च करें, बिजनेस की समझ रखें
एमडीआई मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट गुड़गांव में प्रोफेसर रहे ध्रुवनाथ ने स्टार्टअप को क्या चीजें नहीं करनी चाहिए पर बात रखी। ध्रुवनाथ ने डीयू से कंप्यूटर साइंस में पीएचडी की है और 25 से ज्यादा सफल स्टार्टअप की मेंटरिंग की है। उन्होंने कहा कि मैं 15 सालों से मेंटर हूं। विफलता के कुछ किस्से सुनाकर बताए कि क्या चीजें ध्यान में रखनी चाहिए। आइडियाज तो सबके पास हो सकते हैं लेकिन सबसे जरूरी है कि इंप्लीमेंटेशन कैसे होगा। कैसे उसको मार्केट तक पहुंचाया जाएगा। आइडिया आते ही हर कोई सोचने लगता है कि अब तो बहुत पैसे आएंगे मगर कागज में जो दिखता है वह धरातल पर करना अहम है। इसलिए मार्केट कवर करना जरूरी है। इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए। बिजनेस की समझ जरूरी है। इसके लिए रिसर्च होना चाहिए। मजबूत टीम होनी चाहिए।
ईको सिस्टम के सवाल पर जवाब देतीं जयंती डालमिया
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एमएसएमई या छोटे सेक्टर में आते हैं ज्यादातर स्टार्टअप
इसके बाद फिक्की की लेडीज विंग की नेशनल प्रेसीडेंट जयंती डालमिया ने ईको सिस्टम मुहैया करवाने के सवाल पर अपनी बात रखी। शुरुआत में संस्था का परिचय दिया और बताया कि किस तरह महिलाएं स्टार्टअप में आ रही हैं। चुनौतियों की भी बात की। कहा कि ज्यादातर स्टार्टअप एमएसएमई या छोटे सेक्टर में आते हैं। महिला उद्यमी के लिए परिवार का समर्थन बहुत जरूरी है। परिवार से फायनेंस चाहिए। नए व्यवसाय की शुरुआत के लिए धन जरूरी है। ज्यादातर महिलाओं के नाम से न जमीन होती है न घर होता है। संपत्ति का स्वामित्व न होने के कारण साथ लेना पड़ता है ताकि लोन मिल जाए। डालमिया ने कहा कि दुनिया में इस समय 150 मिलियन स्टार्टअप है। हर वर्ष 50 मिलियन नए स्टार्टअप शुरू हो रहे हैं। स्टार्टअप शुरू करने के लिए पहले युवाओं को तय कर लेना चाहिए कि वे क्या वाकई में इसे करना चाहते हैं। उनके सामने कई परेशानियां आएगी। क्या वे सभी परेशानियों का सामना करने के लिए तैयार है। स्टार्टअप संचालकों को फंडिंग प्राप्त करने और आगे बढ़ने के लिए कई प्रक्रियाओं से गुजरना होता है। स्टार्टअप शुरू करने के पहले सभी पहलुओं को समझ लेना जरूरी है।