हिंदी विमर्श कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान
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मुख्यमंत्री ने कहा कि हम अंग्रेजी के विरोधी नही हैं, लेकिन राष्ट्रभाषा के प्रति जागरूकता जरूरी है। आज यह मानसिकता गलत है कि अंग्रेजी के बिना काम नहीं हो सकता है। मैंने कई मेडिकल कॉलेज के बच्चों को सिर्फ इसलिए मेडिकल कॉलेज छोड़ते देखा है क्योंकि उसकी अंग्रेजी अच्छी नहीं है।
सीएम ने कहा कि रूस, जापान, जर्मनी, चाइना जैसे देशों में कौन अंग्रेजी को पूछता है? हम ही गुलाम हो गए। यहां गांव गांव में डॉक्टर की जरूरत है। सीएम ने मजाकिया अंदाज में कहा दवाई के नाम हिंदी में क्यों नहीं लिखे जा सकते। इसमें क्या दिक्कत है। उन्होंने कहा कि दवाई का नाम क्रोसिन लिखा है तो क्रोसिन हिंदी में भी लिखा जा सकता है। उसमें क्या दिक्कत है? ऊपर श्री हरि लिखा और नीचे क्रोसिन लिखा दो। उन्होंने कहा कि यहां डॉक्टर मित्र बैठे हैं वो तरीके निकालेंगे।
कार्यक्रम में अंग्रेजी में बोर्ड का मुद्दा उठा। इस पर सीएम ने आश्वस्त किया कि आने वाले समय में बोर्ड हिंदी में लगवाएंगे। सीएम ने कहा कि मुझे एक नौजवान बड़ा दु:खी सा मिला। मैंने कहा क्या बात है तो उसने कहा कि मेरे फादर डेड हो गए। मतलब सब को लगता है कि अंग्रेजी कैसे भी बोलो अंग्रेजी आनी चाहिए।