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गौशाला बनी कब्रगाह: रीवा में 50 से ज्यादा गायों की मौत, दफनाने की जगह तालाब में फेंके जा रहे थे शव 

Thu, 17 Feb 2022 04:43 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रीवा

सार

रीवा जिले की शासकीय गौशाला में 50 से ज्यादा गायों की मौत का मामला सामने आया है।  स्थानीय लोगों ने शवों से आने वाली बदबू से परेशान होकर प्रशासन को इसकी जानकारी दी, तब मामला का खुलासा हुआ।
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रीवा: तालाब के किनारे पड़े गायों के कंकाल - फोटो : अमर उजाला
रीवा जिले की शासकीय गौशाला में 50 से ज्यादा गायों की मौत का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों ने शवों से आने वाली बदबू से परेशान होकर प्रशासन को इसकी जानकारी दी, तब मामले का खुलासा हुआ।

मामला रीवा जिले के रायपुर कर्चुलियान जनपद पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत चोरगड़ी गांव में स्थित शासकीय गौशाला का है। गौशाला के पीछे बने तालाब में गायों की हड्डियां और कंकाल मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। दरअसल गौशाल में 200 से ज्यादा मवेशियों को रखने की व्यवस्था की गई है, लेकिन मवेशियों के मरने के बाद प्रशासन ने उनके अंतिम संस्कार की कोई व्यवस्था नहीं की। गौशाला की देख-रेख करने वाले जिम्मेदार गौशाला में मरने वाली गायों के शव जलाने या दफनाने की बजाय उसे पीछे बने तालाब में फेंकते जा रहे थे और उसे कब्रगाह बना दिया था। स्थानीय लोगों की जानकारी के बाद प्रशासन मौके पर पहुंचा और मामले की जांच शुरू की।

 
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रीवा की शासकीय गौशाला जहां गायों की मौत हुई है - फोटो : अमर उजाला

गौशाला के पीछे बने तालाब में 50 से ज्यादा गायों को फेंका जा चुका है। जिनके कंकाल बरामद किए गए हैं। मृत गायों से उठने वाली दुर्गंध से आस-पास के लोगों का जीना मुहाल हो गया है। प्रशासन की व्यवस्थाएं किस तरह लचर हैं गौशाला की तस्वीरें इसकी कहानी बताने के लिए काफी हैं।  

घटना की जानकारी लगने पर पहुंची मीडिया ने जब गौशाला प्रबंधक शत्रुघन सिंह ने सवाल पूछे तो वो सवालों का जवाब देने से बचते नजर आए। उन्होंने कहा की गौशाला में गायों के लिए पर्याप्त मात्रा में खाने पीने की व्यवस्था की गई है, जबकि गौशाला में स्थिति इससे ठीक उलट थी। गायों की मौत को लेकर गौशाला सरंक्षक ने बेतुका बयान देते हुए कहा कि गाय अगर मरती हैं, तो उन्हें गंगा जी नहीं ले जाया जा सकता है। 

गौशाला संचालक ने बताया कि गौशाला में 200 से अधिक मवेशियों के रखने की व्यवस्था कराई गई है, लेकिन मवेशियों को दफनाने की व्यवस्था नहीं है। मौत के बाद मवेशियों को खुले में ही एक तालाब में फेंक दिया जाता है। वहीं, गौशाला का निरीक्षण करने मौके पर पहुंचे मनगवां एसडीएम संजीव पाण्डेय ने जांच के बाद दोषियों पर उचित कार्रवाई करने की बात कही है। 


 
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रीवा: गायों के लिए चारे पानी की व्यवस्था तक नहीं है - फोटो : अमर उजाला

रीवा से पहले भोपाल में भी गौशाला में इसी तरह की बानगी देखने को मिली थी, जहां बीजेपी नेत्री की गौशाला में 80 से ज्यादा गायों के कंकाल मिले थे। इस घटना से एमपी में गायों के मरने पर सियासत भी गर्मा गई थी। 

मध्य प्रदेश सरकार गायों की खूब चिंता करती है। बातें भी खूब होती हैं। पर बड़े-बड़े वादे जमीन पर धराशायी हो रहे हैं। भोपाल के बाद अब रीवा में भी गौशाला गायों की कब्रगाह बन गई है। जिन गौशालाओं में गायों को अच्छी देखभाल बेहतर भोजन मिलना चाहिए वहां उन पर अत्याचार किए जा रहे हैं। खुले छत के नीचे वो पूरा वक्त बंधी रहती हैं। पानी तक के लिए गायों को तरसना पड़ रहा है। मवेशियों की सुविधाओं को देखते हुए सरकार ने पंचायत स्तर पर गौशाला बनाए जाने के दावे किए थे ताकि गांवों में विचरण करने वाले मवेशियों को सुरक्षित रखा जा सके, लेकिन लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी सरकार का कोई वादा हकीकत में नहीं बदला। 
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