ऐतिहासिक राजवाड़ा प्रांगण में आज दशहरा मिलन समारोह भव्यता और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर श्रीमंत महाराज कुमार प्रिंस शिवाजीराव यशवंतराव होलकर एवं विधायक राजकुमार मेव अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह में पुण्यश्लोका देवी अहिल्याबाई होलकर गैलेरी का लोकार्पण हुआ, जो शीघ्र ही राजवाड़ा महेश्वर में स्थापित होकर जनसामान्य और पर्यटकों के लिए खुलेगी। इस अवसर पर “अहिल्या माता” विषयक एक विशिष्ट पुस्तक का भी विमोचन किया गया, जो देवी अहिल्याबाई के जीवन, कार्य और शासन दृष्टि पर आधारित है।
कार्यक्रम में खासगी देवी अहिल्याबाई होलकर चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमंत युवराज यशवंतराव होलकर (तृतीय), ट्रस्ट के माननीय ट्रस्टीगण तथा ब्रिगेडियर रणदीप सिंह डडवाल की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की।
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देवी अहिल्या गैलेरी का उद्घाटन
- फोटो : अमर उजाला
अहिल्या गैलरी — इतिहास, भक्ति और सुशासन की जीवंत प्रदर्शनी
राजवाड़ा की पारंपरिक मराठा शैली की भव्य वास्तुकला में निर्मित यह गैलेरी पुण्यश्लोक देवी अहिल्याबाई होलकर के जीवन की अनुपम गाथा को सजीव रूप में प्रस्तुत करेगी।
दालान के सामने स्थित राज गादी चौक का हाल ही में नूतनीकरण सविता राजे होलकर के सुसंवेदनशील मार्गदर्शन में किया गया। दालान में पद्मश्री भालू मोंढे द्वारा निर्मित हाथ से बनी एवं हाथ से रंगी डियोरामा शृंखला देवी अहिल्याबाई के जीवन के प्रमुख प्रसंगों को अत्यंत कलात्मक और भावनात्मक शैली में प्रदर्शित करती है।
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पारंपरिक मराठा शैली में बनी है गैलेरी
- फोटो : अमर उजाला
गैलेरी के दूसरे खंड में होलकर राजवंश गैलरी स्थापित की गई है, जहां होलकर शासनकाल के ऐतिहासिक शस्त्र, पालकियां, प्राचीन सिक्के और दुर्लभ धरोहरें प्रदर्शित हैं। इन वस्तुओं का संरक्षण रेषाग्रंथ जीर्णोद्धारक, पुणे द्वारा किया गया है।
इसका डिजाइन वास्तु विशारद हिमांशु दुडवडकर एवं सुमीत जेठानी ने तैयार किया है। अनुसंधान एवं दस्तावेजी कार्य होलकर कल्चरल सेंटर की धनश्री लुंगे और मंदार चौधरी ने इतिहासकार रामभाऊ लांडे तथा डॉ. वैशाली बालाजीवाले के सहयोग से संपन्न किया।
यह संपूर्ण परियोजना खासगी देवी अहिल्याबाई होलकर चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में तथा अहिल्या फोर्ट हेरिटेज होटल के वित्तीय सहयोग से साकार हुई है।
इस अवसर पर वक्तव्य देते हुए प्रिंस यशवंतराव होलकर ने कहा कि “देवी अहिल्याबाई होलकर भारतीय इतिहास में एक अनुपम स्थान रखती हैं। वे ऐसी शासिका थीं, जिन्होंने भक्ति, दृष्टि और करुणा को शासन के साथ जोड़ा। इस गैलेरी के माध्यम से हम चाहते हैं कि श्रद्धालु और पर्यटक उनके जीवन और कार्यों की गहराई को समझें ताकि आने वाली पीढ़ियां इस अद्वितीय आदर्श से प्रेरणा प्राप्त करें।”
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देवी अहिल्याबाई होल्कर पर आधारित पुस्तक का विमोचन
- फोटो : अमर उजाला
इस अवसर पर अहिल्या स्मारिका के विशेषांक का विमोचन डॉ. विजय विश्वनाथ राजोपाध्याय द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि “प्रातःस्मरणीया पुण्यश्लोका देवी श्री अहिल्याबाई होलकर की त्रिशताब्दी के अवसर पर यह विशेषांक पुष्पांजलि के समान है। तीन सौ वर्षों के पश्चात भी किसी शासक को इतनी श्रद्धा और प्रेम से स्मरण किया जाना, उनके चरित्र की महानता का प्रमाण है।”
उन्होंने बताया कि यह विशेषांक, पूर्व प्रकाशित इतिहासकारों एवं विद्वानों डॉ. रघुबीर सिंह, हीरालाल शर्मा, डॉ. कमल गोखले, डॉ. गणेश मतकर आदि के लेखों से समृद्ध किया गया है। साथ ही समकालीन शोधकर्ताओं डॉ. सुलोचना पाटिल, डॉ. देवीदास पोटे, डॉ. एम. रायकवार, डॉ. मनोहर राणावत, मिलिंद कुमार महाजन आदि के लेख भी इसमें सम्मिलित हैं।
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दशहरा मिलन समारोह में पहुंचे मुख्य अतिथि
- फोटो : अमर उजाला
डॉ. राजोपाध्याय ने श्रीमंत महारानी उषा देवी होलकर के प्रति भी कृतज्ञता व्यक्त की, जिन्होंने स्मारिका प्रकाशन हेतु अपना लेख एवं प्रोत्साहन प्रदान किया।
प्रिंस यशवंतराव होलकर ने इस अवसर पर घोषणा की कि त्रिशताब्दी वर्ष में “कम्युनिटी मेडल” नामक एक विशेष सम्मान आरंभ किया जा रहा है। यह मेडल देवी अहिल्या बाल ज्योति स्कूल की छात्राओं के शैक्षणिक उत्थान हेतु समर्पित होगा।
गैलरी में प्रदर्शित प्राचीन सिक्के और दुर्लभ धरोहरें
- फोटो : अमर उजाला
इस मेडल के केवल तीन विशेष संस्करण बनाए जाएंगे और प्रत्येक 300 ग्राम चांदी से निर्मित होगा। इसके अतिरिक्त 30 ग्राम सिल्वर बटालियन मेडल तथा कॉपर संस्करण भी जारी होंगे। इनसे प्राप्त समस्त आय बालिकाओं की शिक्षा में प्रयुक्त की जाएगी।
डॉ. विजय विश्वनाथ राजोपाध्याय ने अपने आभार वक्तव्य में कहा कि यह कार्य खासगी ट्रस्ट के स्नेहपूर्ण सहयोग के बिना संभव नहीं था। उन्होंने सभी सम्मानित अतिथियों का आभार प्रकट करते हुए कहा कि यह गैलेरी और स्मारिका न केवल श्रद्धांजलि हैं, बल्कि लोकमाता अहिल्या की उस अमर ज्योति का पुनर्प्रकाशन हैं, जो सदा समाज के कल्याण और नारी सशक्तिकरण का पथ आलोकित करती रहेगी।