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मध्य प्रदेश: जानिए कौन हैं राष्ट्रपति से नारी शक्ति पुरस्कार प्राप्त करने वाली जोधइया बाई

Tue, 08 Mar 2022 04:23 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार


मध्य प्रदेश: जानिए कौन हैं राष्ट्रपति से नारी शक्ति पुरस्कार प्राप्त करने वाली जोधइया बाई
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राष्ट्रपति से नारी शक्ति पुरस्कार प्राप्त करती जोधइया बाई। - फोटो : सोशल मीडिया
मध्य प्रदेश के उमरिया जिले की रहने वाली जोधइया बाई को राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया। जोधइया बाई कभी स्कूल तो नहीं गई, लेकिन उनकी अद्भुत कला के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें पहचाना जाता है।

 

मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल उमरिया जिले के एक छोटे से गांव लोढ़ा में रहने वाली जोधइया बाई 40 साल से भी ज्यादा समय से आदिवासी पेंटिंग्स बना रही हैं। 82 साल की उम्र में भी उनके हाथ कैनवास पर खूबसूरत चित्रों को उकेर रहे हैं। वे प्रदेश की जनजातीय कला को अपने रंगों से सजा कर युवा पीढ़ी को मध्य प्रदेश के ट्राइबल आर्ट से रूबरू करा रही हैं। 
 
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बैगा चित्रकार जोधइया बाई। - फोटो : सोशल मीडिया

अपने पति की मौत के बाद परिवार पालने के लिए उन्होंने पेंटिंग्स बनाने का काम शुरू किया था। वे अपने आसपास जो भी देखती थी, उसे उकेर देती हैं। उनकी कला ने उन्हें सिर्फ देश तक सीमित नहीं रखा बल्कि उन्हें इंटरनेशनल स्टार बनाया। इटली के मिलान से लेकर फ्रांस के पेरिस तक उनकी पेंटिंग्स प्रदर्शित हो चुकी हैं। इसके साथ ही इंग्लैंड, अमेरिका और  जापान जैसे देशों में भी उनकी पेंटिंग्स लाखों लोग देख चुके हैं। जोधइया बाई को देश की कई संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।

जोधइया बाई के जीवन का लंबा समय मजदूरी में गुजरा, लेकिन पति की मौत के बाद परिवार पालने के लिए उन्होंने किसी दूसरे काम को करने की ठानी और आदिवाली कला को अपने रंगों से सजाने का सफर शुरू हुआ। पेंटिंग्स के लिए वे देश के कई शहरों का दौरा कर चुकी हैं। जोधइया बाई भगवान, जानवरों और तरह-तरह के चित्र बनाती हैं, उनके चित्रों को देखने वाला बस उन्हें देखते ही रह जाता है।
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जोधइया बाई द्वारा की गई बैगा चित्रकारी। - फोटो : सोशल मीडिया

ऐसे मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान
जोधइया बाई पढ़ी लिखी नहीं हैं लिहाजा उन्हें अपनी अद्भुत कला के बारे में उतनी जानकारी नहीं थी, उनके परिवार के लोगों ने भी प्रदर्शनी लगाने के लिए कभी किसी तरह की कोशिश नहीं की। एक बार स्थानीय कला प्रेमी आशीष स्वामी की नजर उनके बनाए चित्रों पर पड़ी, आशीष ने भोपाल के बोन ट्राइबल आर्ट में ट्राइबल आर्ट की जानकार पद्मजा श्रीवास्तव को जोधइया बाई की जानकारी दी। जोधइया बाई की पेंटिंग्स को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए आशीष स्वामी ने इटली की गैलेरिया फ्रांसिस्को जनूसो संस्था से संपर्क किया। अक्टूबर 2019 में उनकी पेंटिंग्स की प्रदर्शनी इटली के मिलान शहर में लगी थी। 

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जोधइया बाई करीब 40 साल से बैगा चित्रकारी कर रही हैं। - फोटो : सोशल मीडिया

पुरस्कार मिलने पर गुरू आशीष स्वामी को किया याद
जोधइया बाई ने नारी शक्ति पुरस्कार मिलने पर अपने गुरू आशीष स्वामी को नम आंखों से याद किया। उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में आशीष स्वामी का खास योगदान था, कुछ महीनों पहले उनकी मृत्यु हो गई है। जोधइया बाई ने कहा कि वे अपने गुरू की इच्छा का पालन करेंगी और बैगा चित्रकारी को भी उत्कृष्ट रूप में प्रस्तुत करेंगी।
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इटली, फ्रांस और कई देशों में उनकी पेंटिंग्स की प्रदर्शनी लग चुकी है। - फोटो : सोशल मीडिया

जोधइया बाई की उपलब्धियां
जोधइया बाई ने बैगा चित्रकारी को अंतरराष्ट्रीय पहचान देने के साथ ही इसे विलुप्त होने से भी बचाया है। वे शांति निकेतन विश्व भारती विश्वविद्यालय, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, आदिरंग कार्यक्रम में शामिल और सम्मानित हो चुकी हैं। मध्य प्रदेश के जनजातीय संग्रहालय भोपाल में जोधइया बाई के नाम से एक स्थाई दीवार बनी हुई है, जिस पर उनके बनाए हुए चित्र हैं।मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उन्हें सम्मानित कर चुके हैं। वे मानस संग्रहालय में शामिल हो चुकी हैं। अमेरिका और जर्मनी के लोग जोधइया बाई के लोकचित्रों को ले जा चुके हैं।
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