जिंदा रहते हुए कई लोग ऐसा काम करते हैं, जिसकी खूब चर्चा होती है। लेकिन, ऐसे लोग कम ही होते हैं जो दुनिया को अलविदा कहने के बाद भी कुछ ऐसा कर जाते हैं जिसे कभी नहीं भुलाया जा सकता। ऐसा ही कुछ किया है मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में रहने वाले 24 साल के विशाल मोयदे ने। ब्रेन डेड होने के बाद विशाल ने सात लोगों को नई जिंदगी देगी। विशाल अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन फिर भी वे देश भर के सात लोगों में जिंदा रहेगा। आज नेशनल वर्ल्ड ऑर्गन डोनेशन डे पर पढ़िए ये कहानी...।
खरगोन जिला मुख्यालय से करीब 40 किमी दूर कसरावद ब्लॉक के सांगवी गांव में रहने वाले विशाल मोयदे का सपना कलेक्टर बनने था। विशाल इसकी तैयारी में भी जुटा हुआ था। 25 जुलाई को वह खंड़वा रोड स्थित एक स्कूल में डीएड का पेपर हल कर रहा था। इस दौरान उसके सिर में तेज असहनीय दर्द होने लगा। उसने पेपर हॉल में मौजूद शिक्षकों को इसकी जानकारी तो उन्होंने तत्काल एंबुलेंस बुलाकर विशाल को जिला अस्पताल भेजा। जहां, कुछ देर बाद वह बेहोश हो गया। इसके बाद परिजन उसे एक निजी अस्पताल ले गए, अगले दिन उसे इंदौर के एक अस्पताल ले जाया गया, लेकिन हालत में अधिक सुधार नहीं हुआ। बेटे विशाल की हालत में कोई सुधार नहीं होने पर परिजन उसे बड़ौदा (गुजरात) के मल्टीस्पेशलिटी जाइडस अस्पताल लेकर पहुंचे। लेकिन, सोमवार को डॉक्टरों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।