लाइट एंड साउंड शो।
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कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण भाग महेश्वर की गौरवशाली पहचान महेश्वरी हैंडलूम को समर्पित है। करघों की ध्वनि, बुनकरों के परिश्रम और अहिल्या बाई द्वारा विकसित इस परंपरा को दृश्य-श्रव्य माध्यम से बेहद सजीव रूप में उकेरा गया है।
महेश्वर और निमाड़ के शौर्य इतिहास को रेखांकित करते हुए मंच संचालक ने कहा, “इस प्रस्तुति में क्षेत्र के वीर सैनिकों के त्याग और बलिदान को भी विशेष स्थान दिया गया है। उनके साहस, कर्तव्यनिष्ठा और मातृभूमि के प्रति समर्पण को जिस गरिमा के साथ प्रस्तुत किया गया है, वह न केवल दर्शकों को भावुक करता है, बल्कि राष्ट्र के प्रति गर्व की भावना भी जागृत करता है। यह शो हमारे गौरवशाली इतिहास का केवल पुनर्पाठ नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरक संदेश है कि संस्कार, समर्पण, परिश्रम और राष्ट्रहित के मार्ग पर चलकर ही समाज और देश का भविष्य सुरक्षित बनाया जा सकता है।”